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सेबी में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी: हितों के टकराव और संपत्ति खुलासे के नियम होंगे और सख्त

नियामक संस्थान के अंदर पारदर्शिता और नैतिक आचरण को प्राथमिकता देने से न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि वित्तीय बाजार में जवाबदेही और सुशासन की नई परंपरा भी स्थापित होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) में जल्द ही बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. दरअसल, बुधवार को सेबी की उच्च स्तरीय समिति ने सुझाव दिया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अधिकारियों को अपनी संपत्तियों, देनदारियों और वित्तीय गतिविधियों का खुलासा अनिवार्य करना चाहिए. इसके लिए अब सेबी में हितों के टकराव और खुलासों से जुड़े नियमों में व्यापक सुधार की तैयारी की जा रही है. समिति ने कहा है कि वर्तमान ढांचा अपर्याप्त है और इसे मजबूत करने की जरूरत है ताकि नियामक में जनता का भरोसा बढ़ाया जा सके.

संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों का नियमित खुलासा जरूरी

समिति ने सिफारिश की है कि सेबी बोर्ड के सभी सदस्यों और अधिकारियों को अपनी सभी परिसंपत्तियों, देनदारियों, ट्रेडिंग गतिविधियों और संबंधित पक्षों से रिश्तों की जानकारी नियुक्ति के समय, सालाना, पद परिवर्तन के दौरान और पद छोड़ते वक्त देनी होगी. 

परिवार’ की परिभाषा को किया गया व्यापक

खुलासे और हितों के टकराव के प्रबंधन के लिए ‘परिवार’ की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है. अब इसमें पति/पत्नी, आश्रित बच्चे, कानूनी रूप से देखरेख में रहने वाले व्यक्ति तथा आर्थिक रूप से आश्रित रिश्तेदार शामिल होंगे.

शीर्ष अधिकारियों पर निवेश की सीमा

समिति ने सुझाव दिया है कि सेबी के शीर्ष अधिकारियों द्वारा किया जाने वाला कोई भी नया निवेश केवल पेशेवर रूप से प्रबंधित पूल्ड योजनाओं में किया जाए और यह उनके व्यक्तिगत पोर्टफोलियो का अधिकतम 25% हो. अंशकालिक सदस्यों को इस नियम से छूट मिल सकती है, पर वे गोपनीय जानकारी के आधार पर कोई लेनदेन नहीं कर सकेंगे.

जीवनसाथी और आश्रितों पर भी लागू होंगे नियम

निवेश से जुड़ी ये पाबंदियां अधिकारियों के जीवनसाथी और आर्थिक रूप से उन पर निर्भर रिश्तेदारों पर भी लागू होंगी. समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के पद छोड़ने पर सेबी को सालाना सारांश प्रकाशित करना चाहिए और ‘नैतिकता एवं अनुपालन कार्यालय’ की स्थापना की जानी चाहिए.

भविष्य में पारदर्शिता पर और जोर

समिति की सिफारिशें लागू होने के बाद सेबी के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता की नई व्यवस्था स्थापित होगी. इससे बाजार में विश्वास बहाल होने के साथ ही हितों के टकराव जैसी स्थितियों पर लगाम लगने की उम्मीद है. इस समिति की अध्यक्षता पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त *प्रत्यूष सिन्हा* ने की, जबकि *इंजेती श्रीनिवास, पूर्व सचिव (कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय), इसके उपाध्यक्ष रहे. समिति का गठन सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मार्च 2025 में किया था, जब सेबी की पूर्व चेयरपर्सन पर हितों के टकराव के आरोप लगे थे.


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