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नई औद्योगिक बढ़त की तैयारी, केंद्र ने 7,280 करोड़ रुपये की मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी
चीन पर निर्भरता कम करने और हाई-टेक उद्योगों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) को बढ़ावा देने वाली बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
केंद्र सरकार ने बुधवार को 7,280 करोड़ रुपये की लागत वाली नई औद्योगिक योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत देश में हर साल 6,000 मीट्रिक टन की क्षमता वाले अत्याधुनिक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स का उत्पादन किया जाएगा. ये मैग्नेट दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट्स में शामिल होते हैं और इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर-विंड एनर्जी, मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रक्षा और मिसाइल तकनीक में किया जाता है. मेडिकल क्षेत्र में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है.
योजना का ढांचा और फंडिंग, कैसे मिलेगा उद्योगों को लाभ
सरकार इस योजना के तहत कुल ₹6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि और ₹750 करोड़ की कैपिटल सब्सिडी देगी. इसका उद्देश्य देश में रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर फाइनल मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है. उत्पादन क्षमता वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के तहत यह राशि 5 लाभार्थियों को दी जाएगी. हर लाभार्थी को अधिकतम 1,200 टन प्रति वर्ष की क्षमता मिलेगी. योजना की कुल अवधि 7 वर्ष होगी, पहले 2 वर्ष प्लांट सेटअप के लिए और अगले 5 वर्ष उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन के लिए होंगे.
सप्लाई चेन होगी मजबूत
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स में अब तक चीन का दबदबा रहा है. हाल ही में चीन द्वारा निर्यात प्रतिबंध लगाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी, जिसका असर इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर भी पड़ा था. भारत इस योजना के माध्यम से विदेशी निर्भरता कम करने और REPM क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
रोजगार और उद्योग दोनों को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत मिशन को गति देगी. नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को समर्थन देगी. विकसित भारत @2047 विजन को मजबूत करेगी. इसके साथ ही देश में नए रोजगार बढ़ेंगे और हाई-टेक उद्योगों की सप्लाई चेन विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगी.
नई REPM योजना भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ले आएगी जो उन्नत मैग्नेट तकनीक का घरेलू उत्पादन करते हैं. यह न सिर्फ उद्योगों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी बल्कि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.
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