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IPO नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, प्री-IPO गिरवी शेयरों के लॉक-इन को आसान बनाएगा सेबी
सेबी के प्रस्तावित बदलाव आईपीओ प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारतीय बाजार में आईपीओ (IPO) प्रक्रिया को पारदर्शी और निवेशकों के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में सेबी अहम बदलावों की तैयारी कर रहा है. नियामक ने प्री-आईपीओ गिरवी शेयरों के लॉक-इन नियमों में सुधार और जटिल संक्षिप्त विवरणिका की जगह आसान सारांश दस्तावेज लाने का प्रस्ताव रखा है.
सेबी का प्रस्ताव, लॉक-इन नियमों में होगी ढील
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने एक परामर्श पत्र जारी कर प्री-आईपीओ गिरवी शेयरों के लॉक-इन से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की बात कही है. सेबी ने आईसीडीआर विनियम 2018 में संशोधन के जरिए इन बदलावों को लागू करने की सिफारिश की है.
मौजूदा नियमों के अनुसार प्रवर्तक श्रेणी में न आने वाली प्री-आईपीओ शेयरहोल्डिंग को आईपीओ के बाद छह महीने तक लॉक-इन रहना आवश्यक है. लेकिन, गिरवी शेयरों पर डिपॉजिटरी लॉक-इन की अवधि निर्धारित नहीं कर पाती, जिससे कई कंपनियों को अंतिम समय में अनुपालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
गिरवी शेयरों को 'गैर-हस्तांतरणीय' चिह्नित करने की अनुमति
इन चुनौतियों से बचने के लिए सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि डिपॉजिटरी को जारीकर्ता के निर्देशों के आधार पर ऐसी शेयरधारिता को लॉक-इन अवधि के दौरान गैर-हस्तांतरणीय के रूप में चिह्नित करने की अनुमति दी जाए.
जारीकर्ताओं को अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में भी संशोधन करना होगा ताकि गिरवी हटाने या छोड़ने के बाद भी शेयर आवश्यक लॉक-इन अवधि के तहत संबंधित खातों में सुरक्षित बने रहें. सेबी ने बताया कि गैर-सूचीबद्ध शेयरों के बदले ऋण देने वाली एनबीएफसी ने इस मॉडल को स्वीकार किया है.
संक्षिप्त विवरणिका खत्म होगी. आएगा सरल दस्तावेज सारांश
सेबी ने प्रत्येक आईपीओ आवेदन के साथ अनिवार्य संक्षिप्त विवरणिका को हटाने का भी प्रस्ताव दिया है. इसके स्थान पर एक मानक पेशकश दस्तावेज सारांश उपलब्ध कराया जाएगा.
यह सारांश मसौदा दस्तावेज के साथ जमा होगा और इसे सेबी, स्टॉक एक्सचेंजों, जारीकर्ता तथा प्रमुख प्रबंधकों की वेबसाइटों पर अलग से प्रकाशित किया जाएगा. इसमें उद्योग और व्यवसाय का सार, प्रमुख जोखिम, वित्तीय स्थिति, मुकदमेबाजी और प्रवर्तकों की जानकारी जैसे महत्वपूर्ण खुलासे शामिल होंगे.
खुदरा निवेशकों की सुविधा पर फोकस
सेबी का मानना है कि मौजूदा भारी-भरकम प्रस्ताव दस्तावेज खुदरा निवेशकों के लिए समझने में कठिन होते हैं. ऐसी स्थिति में कई निवेशक अपुष्ट ग्रे मार्केट संकेतों और सोशल मीडिया जानकारी पर निर्भर हो जाते हैं. नया सारांश दस्तावेज उनकी सुविधा बढ़ाएगा और निवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बना सकता है.
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