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बिजली वितरण में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, निजी कंपनियों को मिलेगी एंट्री

सरकार का बड़ा कदम: एक ही क्षेत्र में कई कंपनियों से बिजली लेने का मिलेगा विकल्प, उपभोक्ताओं को होगा सीधा फायदा मिलेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

भारत के पावर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा सुधार होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने बिजली वितरण को निजी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी कर ली है. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश की बिजली व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सेवाएं सुधरेंगी और उपभोक्ताओं को गुणवत्ता वाली बिजली मिलने लगेगी. अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को कानून का रूप देती है, तो यह भारत के बिजली क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ होगा. इससे न केवल निजी कंपनियों को अवसर मिलेगा, बल्कि करोड़ों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, प्रतिस्पर्धी और सस्ती बिजली भी उपलब्ध हो सकेगी.

बिजली वितरण पर खत्म होगा सरकारी कंपनियों का एकाधिकार

केंद्रीय बिजली मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट बिल के अनुसार, अब निजी कंपनियां भी उपभोक्ताओं को सीधे बिजली बेच सकेंगी. अभी तक केवल कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात में ही आंशिक निजीकरण हुआ है, जबकि शेष राज्यों में बिजली आपूर्ति का कार्य मुख्य रूप से राज्य सरकारों की डिस्कॉम कंपनियां करती हैं, जो अक्सर घाटे में चल रही हैं.

बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प

ड्राफ्ट बिल लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को पहली बार यह सुविधा मिलेगी कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद कई बिजली प्रदाताओं में से किसी एक को चुन सकें. अदाणी एंटरप्राइजेज, टाटा पावर, टॉरेंट पावर और सीईएससी जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह एक नया अवसर होगा. इससे उपभोक्ताओं को बेहतर दर और सेवा मिलने की संभावना है.

घाटे में चल रहीं डिस्कॉम कंपनियों को राहत की उम्मीद

सरकार का मानना है कि यह सुधार राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ कम करेगा. साथ ही, पुराने वितरण ढांचे को आधुनिक बनाने और निजी निवेश को प्रोत्साहन देने में मदद करेगा. इसी साल उत्तर प्रदेश ने अपनी चार में से दो वितरण कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी.

पावर सेक्टर पर 56,000 करोड़ का बकाया

ऊर्जा क्षेत्र की निगरानी करने वाले इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) की सितंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 तक देश की राज्य-स्वामित्व वाली डिस्कॉम कंपनियों पर बिजली उत्पादकों का लगभग ₹56,000 करोड़ का बकाया है. इससे उत्पादन कंपनियों की नकदी स्थिति बिगड़ती जा रही है और पूरे बिजली क्षेत्र में तरलता की कमी देखने को मिल रही है.

एक क्षेत्र में कई वितरण कंपनियों को अनुमति

मौजूदा बिजली कानून (Electricity Act) के तहत किसी क्षेत्र में एक ही वितरण कंपनी काम कर सकती है. लेकिन प्रस्तावित ड्राफ्ट बिल में यह बदलाव किया गया है कि अब एक ही क्षेत्र में एक से अधिक निजी कंपनियों को बिजली वितरण की इजाज़त दी जा सकेगी. इससे निजी निवेश बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिलेगी.


 


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