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PM मोदी के प्रगतिशील भारत का दृष्टिकोण: विकसित भारत की ओर एक यात्रा

पूर्व राज्य सभा सांसद और HRIT विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. अनिल अग्रवाल

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narednra Modi) ने हाल ही में दिल्ली में 12,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. ये इनीशिएट्स क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और शहरी गतिशीलता को बढ़ाने पर केंद्रित हैं. यह मोदी सरकार की अविचल प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जोकि भारत के विकास के लिए बुनियादी ढांचे को उसकी विकास यात्रा की रीढ़ मानती है.

प्रधानमंत्री का साहिबाबाद से न्यू आशोक नगर तक ‘नमो भारत’ ट्रेन का सफर एक रूटीन इनोग्रल राइड से कहीं अधिक प्रतीकात्मक है. यह शहरी भारत में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की परिवर्तनकारी क्षमता का प्रतीक है. दिल्ली और मेरठ के बीच उच्च गति, सुरक्षित और विश्वसनीय ‘नमो भारत’ कॉरिडोर न केवल यात्राओं को आसान बनाने का वादा करता है, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत भी करता है. इस तरह की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं: शहरी और अंतर-शहर यात्रा को सहज और कुशल बनाना, जिससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है.

शहरी गतिशीलता में क्रांति

मोदी सरकार के अंतर्गत भारत के मेट्रो नेटवर्क में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है. 2014 में, देश के मेट्रो नेटवर्क की लंबाई केवल 248 किलोमीटर थी और यह पांच शहरों तक सीमित था. आज, 21 शहरों में 1,000 किलोमीटर से अधिक मेट्रो रूट चालू हैं, और 1,000 किलोमीटर से अधिक रूट तेजी से विकास के अधीन हैं. भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क के रूप में स्थान रखता है, और इसका लक्ष्य दूसरे सबसे बड़े नेटवर्क बनने का है.

दिल्ली-एनसीआर इस परिवर्तन का उदाहरण है. 2014 के बाद से इस क्षेत्र का मेट्रो नेटवर्क दोगुना हो चुका है, जो दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ा रहा है. हाल ही में लॉन्च किए गए मेट्रो रूट जैसे रिठाला-कुंडली कॉरिडोर उद्योग और आवासीय हब के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और लाखों लोगों के यात्रा समय में कमी आएगी.

बुनियादी ढांचा: विकास की नींव

मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे को अपने विकास एजेंडे का केंद्र बनाय है. 2014 में 2 लाख करोड़ रुपये के बजट से शुरू होकर, भारत का बुनियादी ढांचा खर्च अब 11 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है. एक्सप्रेसवे, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और मालवाहन गलियारों में निवेश शहरी और ग्रामीण भारत के परिदृश्य को बदल रहे हैं.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में एक्सप्रेसवे अब दिल्ली को प्रमुख औद्योगिक गलियारों से जोड़ते हैं, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिल रहा है. दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा और दिल्ली-एनसीआर में मालवाहन गलियारों का मिलन इस बात का उदाहरण है कि कैसे आधुनिक बुनियादी ढांचा आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन दोनों का आधार है.

स्वास्थ्य और कल्याण: एक समग्र दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी का विकास दृष्टिकोण केवल कंक्रीट और स्टील तक सीमित नहीं है. सबसे गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवा को सुलभ बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सरकार पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है. AYUSH क्षेत्र, जो अब 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है, भारत की समृद्ध धरोहर और वैश्विक अपील का प्रमाण है. AYUSH वीजा सुविधा और भारत में WHO का पहला पारंपरिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने जैसी पहलें भारत को समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर रही हैं.

रोहिणी में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI) की हाल ही में रखी गई नींव पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह सरकार के "हील इन इंडिया" पहल से मेल खाता है, जिसे "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम की सफलता के समान वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त बनाने की दिशा में देखा जा रहा है.

परिवर्तन का एक दशक

पिछले एक दशक में, मोदी सरकार ने शासन के रूप को फिर से परिभाषित किया है, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण उसके दो प्रमुख स्तंभ बने हैं. नमो भारत कॉरिडोर, मेट्रो विस्तार और स्वास्थ्य सेवा में सुधार जैसे परियोजनाएं एक समावेशी और भविष्यवादी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं. ये पहलें सिर्फ सुविधा के बारे में नहीं हैं, बल्कि यह सभी नागरिकों के लिए समानता, गरिमा और अवसरों को बढ़ावा देने के बारे में हैं, जिसमें मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग भी शामिल हैं.

विकसित भारत का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी का बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करना सिर्फ वर्तमान चुनौतियों का समाधान करना नहीं है, बल्कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आधारशिला रखने का कार्य है. दिल्ली-एनसीआर में की गई पहलें एक बड़े राष्ट्रीय परियोजना के हिस्से के रूप में हैं, जो एक आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धी भारत बनाने की दिशा में हैं.

भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताबदी की ओर बढ़ रहा है, मोदी सरकार का 'विकसित भारत' का दृष्टिकोण आशा और प्रगति का एक प्रकाश स्तंभ है. बुनियादी ढांचे को आधार और नवाचार को चालक मानते हुए, यह राष्ट्र प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील नेतृत्व में अपनी अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए तैयार है.

भारत की यात्रा, जैसा कि दिल्ली-एनसीआर में उद्घाटित परियोजनाओं से स्पष्ट है, सिर्फ पुलों और रेलवे को बनाने की नहीं है, बल्कि यह आकांक्षाओं को जोड़ने, नागरिकों को सशक्त बनाने और राष्ट्र को विकास की अप्रतिम ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बारे में है. यह कल का भारत है—जो उदाहरण पेश करता है और चुनौतियों को अवसरों में बदलता है.

अतिथि लेखक-डॉ. अनिल अग्रवाल, राज्यसभा सांसद 


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