होम / बिजनेस / बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंड्स पर भरोसा कायम, अप्रैल में ₹38,440 करोड़ का निवेश फ्लो

बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंड्स पर भरोसा कायम, अप्रैल में ₹38,440 करोड़ का निवेश फ्लो

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

वैश्विक अनिश्चितताओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता के बावजूद म्युचुअल फंड्स (MF) में निवेश का सिलसिला मजबूत बना हुआ है. अप्रैल 2026 में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. हालांकि यह मार्च के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा कम रहा, लेकिन लगातार ऊंचा निवेश यह दिखाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अब भी बाजार पर कायम है. खास बात यह रही कि स्मॉलकैप, मिडकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने रहे.

मार्च के रिकॉर्ड के करीब रहा निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश आया. मार्च में यह आंकड़ा ₹40,450 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था. हालांकि अप्रैल में कुल निवेश में करीब 16 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर ₹70,302 करोड़ रह गया, लेकिन रिडेम्प्शन यानी निकासी में 26 फीसदी की बड़ी कमी देखने को मिली. निकासी घटकर ₹31,862 करोड़ पर आ गई, जो पिछले आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है.

बाजार की रिकवरी ने बढ़ाया भरोसा

अप्रैल के दौरान भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली. अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर चिंताएं कुछ कम होने के बाद बाजार ने मार्च में हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली. महीने के दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि व्यापक बाजार ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स करीब 17 फीसदी तक उछल गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया.

स्मॉलकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स बने पसंदीदा विकल्प

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा. फ्लेक्सीकैप फंड्स में लगातार दूसरे महीने ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में संयुक्त निवेश 9 फीसदी बढ़कर ₹13,437 करोड़ तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी को ध्यान में रखकर छोटे और मिड साइज कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं.

SIP निवेश में आई हल्की नरमी

जहां इक्विटी फंड्स में निवेश मजबूत बना रहा, वहीं सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के मोर्चे पर हल्की कमजोरी देखने को मिली. अप्रैल में SIP निवेश 3 फीसदी घटकर ₹31,115 करोड़ रह गया. हालांकि AMFI का कहना है कि SIP खातों की कुल संख्या स्थिर बनी हुई है और यह गिरावट अस्थायी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार मार्च में कुछ ट्रांजैक्शन छुट्टियों की वजह से शिफ्ट हो गए थे, जिसका असर अप्रैल के आंकड़ों पर पड़ा.

डेट और हाइब्रिड फंड्स में भी मजबूत निवेश

केवल इक्विटी ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. अप्रैल में डेट फंड्स में सबसे ज्यादा ₹2.5 लाख करोड़ का निवेश आया. वहीं हाइब्रिड और पैसिव फंड्स में भी करीब ₹20,000 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया. इसके चलते म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मासिक आधार पर करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली.

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम रहना भारतीय निवेशकों की परिपक्वता को दर्शाता है. स्मॉलकैप फंड्स में लगातार निवेश यह संकेत देता है कि निवेशकों को भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तब भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए SIP और म्युचुअल फंड निवेश बेहतर विकल्प बने रह सकते हैं. लगातार मजबूत निवेश यह संकेत दे रहा है कि भारतीय निवेशक अब बाजार की छोटी अवधि की गिरावट से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं और लंबी अवधि की रणनीति पर भरोसा जता रहे हैं.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड्स शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

4 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

5 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

6 hours ago

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

7 hours ago

पावर प्लांट्स में सिर्फ 9 दिन का कोयला, 42% घटा स्टॉक; लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी चुनौती

बिजली की बढ़ती मांग और परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का दबाव बढ़ा, 190 में से 51 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

8 hours ago


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

7 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

4 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

5 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

6 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

13 hours ago