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एफटीए वार्ताओं के बीच पीयूष गोयल ने उद्योग पर उठाए सवाल, कहा ‘इतनी कमजोरी क्यों?’
एफटीए वार्ताओं के बीच केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय उद्योग वैश्विक बाजारों में खुलापन चाहता है तो उसे घरेलू स्तर पर भी सीमित प्रतिस्पर्धा स्वीकार करनी होगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारतीय उद्योग जगत के एक वर्ग पर “कमजोरी” दिखाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि कुछ उद्योग सीमित आयात प्रतिस्पर्धा का भी विरोध करते हैं जबकि वही उद्योग वैश्विक बाजारों में अधिक पहुंच की मांग करते हैं.
एक उद्योग कार्यक्रम में बोलते हुए गोयल ने कहा कि जब व्यापार समझौतों के दौरान बहुत छोटे आयात कोटा का प्रस्ताव रखा जाता है तो कुछ घरेलू निर्माता उसे लेकर “बहुत बड़ा हंगामा” खड़ा कर देते हैं. उन्होंने कहा, “यह और भी दुखद होता है जब आपका उद्योग इतनी कमजोरी दिखाता है कि केवल एक, दो या तीन प्रतिशत खपत के बराबर आयात कोटा देने पर भी हाय-तौबा मच जाती है. इससे मैं बहुत निराश होता हूं.”
गोयल ने आगे कहा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं भारतीय उद्योग की क्षमता पर सवाल उठाती हैं. “यह आपको बहुत कमजोर दिखाता है. जब मैं यह समझने की कोशिश करता हूं कि दो या तीन प्रतिशत आयात से आपके सौ प्रतिशत घरेलू बाजार पर क्या असर पड़ता है तो बहुत हास्यास्पद जवाब मिलते हैं,” उन्होंने जोड़ा.
मंत्री ने अपने बयान को भारत के प्रमुख अर्थतंत्रों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ चल रही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ताओं के संदर्भ में रखा. उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग वैश्विक बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है लेकिन इसके लिए उसे घरेलू बाजार में “संतुलित प्रतिस्पर्धा” के लिए तैयार रहना होगा.
गोयल ने कहा, “आखिरकार जब हमें एफटीए करने हैं तो हमें सभी क्षेत्रों का सहयोग चाहिए. यह नहीं हो सकता कि हम हर जगह खुले बाजार चाहते हैं लेकिन भारत का बाजार खोलने पर हमारा उद्योग पीछे हट जाए. ऐसा नहीं चलेगा.”
गोयल के बयान का उद्योग जगत के कुछ नेताओं ने समर्थन भी किया. आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयंका ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हमारे वाणिज्य मंत्री बिल्कुल सही हैं. हम वैश्विक बाजारों में खुली पहुंच की मांग नहीं कर सकते अगर हम अपने देश में ही शुल्क दीवारों के पीछे छिपे रहें. प्रतिस्पर्धा से ताकत आती है, सुरक्षा से नहीं. अब भारतीय उद्योग को सहारे छोड़कर दौड़ना शुरू करना होगा.”
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