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पेटीएम और स्विगी में सबसे अधिक चीनी हिस्सेदारी, बीएसई डेटा से हुआ खुलासा
वित्त वर्ष 2024–25 के अंत तक चीन की भारतीय स्टार्टअप्स में हिस्सेदारी को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, वह भारत के डिजिटल और तकनीकी इकोसिस्टम के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत की नई पीढ़ी की सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध यूनिकॉर्न कंपनियों में चीनी निवेश अब भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है. बीएसई के हालिया आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के अंत तक चीनी निवेशकों के पास सबसे अधिक हिस्सेदारी पेटीएम में रही.
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस में चीन की एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग बीवी की 9.85 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. हालांकि हाल के महीनों में एंटफिन ने पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी कम की है, फिर भी यह भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध स्टार्टअप्स में चीन द्वारा सबसे अधिक स्वामित्व वाली कंपनी बनी हुई है.
स्विगी इस सूची में दूसरा नाम है, जिसमें चीनी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 4.4 प्रतिशत रही। इसमें दो प्रमुख निवेशक हैं-Meituan की सहायक कंपनी Inspired Elite Investments और Tencent Cloud Europe BV। Meituan के पास 1.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि Tencent के पास 3.27 प्रतिशत हिस्सेदारी है,
तीसरे स्थान पर पॉलिसीबाजार (PB Fintech) है, जिसमें Tencent Cloud Europe BV की 2.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसके बाद जोमैटो का स्थान आता है, जिसमें चीनी एंट ग्रुप की सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी Antfin Singapore की 1.95 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
गौरतलब है कि Meituan, Tencent और Ant Group उन तीन चीनी कंपनियों में शामिल हैं जो भारतीय सार्वजनिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं. हालांकि, कुछ प्रमुख स्टार्टअप्स जैसे ओला इलेक्ट्रिक, फर्स्टक्राई (Brainbees), नायका, डेलीवरी, मामा अर्थ, यात्रा, मोबिक्विक और एथर में कोई चीनी निवेश नहीं पाया गया है.
पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने अगस्त 2023 में एंटफिन की हिस्सेदारी को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया था. उन्होंने एंटफिन की 10.3 प्रतिशत हिस्सेदारी अपनी कंपनी रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बी को ट्रांसफर कर दी थी, जिससे एंटफिन की सीधी हिस्सेदारी घटकर 13.5 प्रतिशत रह गई थी. इसके बाद, मई 2025 में एंटफिन ने बाजार में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी और बेच दी, जिससे पेटीएम में चीनी स्वामित्व घटकर 5.85 प्रतिशत रह गया.
हालांकि इसमें गिरावट आई है, लेकिन बीएसई के मुताबिक पेटीएम अब भी उस सूची में सबसे ऊपर है, जिन भारतीय स्टार्टअप्स में चीनी निवेश सबसे अधिक है. यह स्थिति न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि भारत-चीन भू-राजनीतिक तनावों और रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी स्वामित्व पर लगाए गए नियमों की रोशनी में भी विचारणीय है.
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