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एक मशीन बता देगी खाने की क्‍वालिटी से क्‍वांटिटी, कई राज्‍यों में चल रहा है काम

भारत की कंपनी उद्योग यंत्रा जिसका एक प्रोडक्ट खाने की क्वालिटी से लेकर क्वांटिटी कैसी है. जैसे ही खाने को इस मशीन के नीचे रखा जाता है वो सेंसर के जरिए उसका रिजल्ट डाटा सेंटर को भेज देती है.

ललित नारायण कांडपाल 4 years ago

प्रगति मैदान में चल रही है इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जहां एक और बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने फ्यूचर प्रोडक्ट को डिस्प्ले कर रही हैं,वहीं दूसरी ओर कई भारतीय कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट डिस्प्ले कर रही हैं कई स्टार्टअप भी अपने प्रोडक्ट को दिखा रहे हैं. इसी में एक है भारत की कंपनी उद्योग यंत्रा जिसका एक प्रोडक्ट यह बताता है कि खाने की क्वालिटी से लेकर क्वांटिटी कैसी है जैसे ही खाने को इस मशीन के नीचे रखा जाता है मशीन सारी चीजों को सेंसर के जरिए चेक कर देती है और तुरंत उसका रिजल्ट डाटा सेंटर को भेज देती है.

मिट्टी मिल पर रखी जा सकती है नजर
हमारे देश के स्कूलों में छोटे बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील में अक्सर खराबी या खराब क्वालिटी की शिकायत आती रहती है कभी कई बच्चे बीमार हो जाते हैं तो कभी उन्हें पौष्टिक आहार ना मिलने का मामला सामने आते रहता है लेकिन इस मशीन के जरिए दिल्ली में बैठकर भारत के किसी भी कोने में बांटे जा रहे मिड डे मील पर नजर रखी जा सकती है,जैसे ही बच्चे को थाली मिलती है अगर वह उस थाली को इस मशीन के नीचे रख दे तो यह मशीन ऑटोमेटिकली उस खाने की कई तरह की रीडिंग लेकर भेज देती हैं,जिसमें खाने में मौजूद पौष्टिक आहार, खाने की क्वालिटी,  खाने में मौजूद प्रोटीन और विटामिन की संख्या भी अकाउंट करके भेज देती है,जिससे दिल्ली में बैठा शख्स आसानी से यह पता कर सकता है कि दक्षिण भारत के स्कूल में इस वक्त कैसा खाना दिया जा रहा है. 

कई राज्य कर रहे हैं इस मशीन का पायलट प्रोजेक्ट
उद्योग यंत्रा के फाउंडर और सीईओ अंकुर जैन बताते हैं कि मौजूदा समय में उनकी इन मशीनों को 5 राज्यों में टेस्ट किया जा रहा है, जिनमें हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल हैं. इस मशीन का निजी स्कूलों में भी इस्तेमाल हो सकता है जहां बोर्डिंग स्कूल हो या वह स्कूल जहां बच्चों को खाना दिया जाता हो.

कृषि में भी कारगर है कंपनी की मशीन
उद्योग यंत्र कंपनी ने सिर्फ खाने की क्वालिटी ही नहीं बल्कि कृषि कार्यों के लिए भी अपना एक प्रोडक्ट बनाया है इस प्रोडक्ट के जरिए अगर आप किसी भी प्रकार के फल को इसके नीचे रखते हैं तो उससे इसकी क्वालिटी इसकी हेल्दीनेस और इसकी जियो टैगिंग भी हो जाती है. मसलन किन्नौर में जहां से पैदा होता है वहां से कहीं भेजने से पहले अगर इस मशीन के नीचे उसे रख दिया जाए तो वह इसका भार क्वालिटी पौष्टिकता और इसे जियो टैग दे देती है और एक क्यूआर कोड जनरेट कर देती है जिसे स्कैन करते ही यह पता चल जाता है कि यह कहां से कब कितने बजे तक हुआ है.

फूड चेन में भी हो सकता है इसका इस्तेमाल
मौजूदा समय में हमारे देश में कई तरह की फूड चेन काम कर रही है अब वह भले ही हल्दीराम हो या बीकानेर हो या फिर दूसरे बड़े फूड सेक्टर की कंपनियां हो। अंकुर जैन बताते हैं की जो फूड चेन कंपनियां कई बार अपने अलग-अलग जगहों के फ्रेंचाइजी इसके प्रोडक्ट को लेकर चिंतित रहती हैं यह मशीन उनके लिए भी बड़ी कारगर है वह चाहे तो मुंबई में बैठकर कर्नाटक में अपनी फूड चेन कि जिस शॉप का खाना चेक करना चाहे उसे आसानी से किया जा सकता है ग्राहक की थाली को 15 सेकंड के लिए इस मशीन पर रखना होता है जिसके बाद उसकी सारी जानकारी डाटा सेंटर को मिल जाती है यह सब कुछ 5G नेटवर्क के बेहतर होने का एक और नतीजा है.


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