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पैसा रखें तैयार, आ रहा है एक और कंपनी का IPO
पिछले कुछ वक्त में कई कंपनियों के आईपीओ आ चुके हैं. अब एक और कंपनी IPO लेकर आ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इनिशियल पब्लिक आफरिंग यानी IPO में इन्वेस्ट करने वालों के लिए अच्छी खबर है. एक और कंपनी का आईपीओ आने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Tracxn Technologies (TTL) अपना आईपीओ ला रही है, जो 10 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा. कंपनी ने इसका प्राइस बैंड 75-80 रुपए प्रति शेयर तय किया है. Tracxn प्राइवेट कंपनियों के लिए मार्केट इंटेलिजेंस डेटा प्रदान करती है.
ये बेच रहे अपने शेयर
कंपनी के प्रमोटरों में, नेहा सिंह और अभिषेक गोयल के साथ ही फ्लिपकार्ट के संस्थापक बिन्नी बंसल और सचिन बंसल भी शामिल हैं. कंपनी के को-फाउंडर नेहा सिंह और अभिषेक गोयल 76.6 लाख शेयर बेच सकते हैं. वहीं, बिन्नी बंसल और सचिन बंसल प्रत्येक 12.6 लाख शेयर बेचने के बारे में सोच रहे हैं. इसके अलावा, Accel India IV Mauritius, एससीआई इन्वेस्टमेंट्स वी, साहिल बरुआ, दीपक सिंह, ट्रस्टी, कोल्लूरी लिविंग ट्रस्ट, मिलिवेज फंड, रत्नागिरीश मातृभूमि, एपोलेटो एशिया और डब्ल्यूजीजी इंटरनेशनल भी शेयर बेचने में शामिल हो सकते हैं.
12 अक्टूबर तक रहेगा खुला
कंपनी का IPO 10 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और इसे 12 अक्टूबर तक सब्सक्राइब किया जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशक 185 इक्विटी शेयरों तक के लिए बोली लगा सकते हैं. योग्य संस्थागत निवेशकों के लिए 75 फीसदी कोटा रिजर्व रखा गया है, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों को 15% शेयर मिलेंगे. शेष 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल बोलीदाताओं को आवंटित किया जाएगा.
IPO क्या होता है
Initial Public Offer यानी IPO, जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट से यानी शेयर बाजार से पैसे जुटाना चाहती है तो उसके पास बहुत से तरीके होते हैं. उसी में से एक तरीका होता है IPO. जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक में बेचने के लिए ऑफर करती है, तो उसे Initial Public Offer या IPO कहते हैं. ये शेयर BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों की खरीद के लिए रखे जाते हैं. जब ये शेयर निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं तो वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाती है और प्राइवेट से पब्लिक लिस्टेड कंपनी बन जाती है.
IPO क्यों लाती है कंपनी
जब कोई कंपनी शुरू होती है तो उसके पास कई निवेशक होते हैं जो उसमें पैसा डालते हैं, लेकिन एक समय के बाद कंपनी को जब अपना विस्तार करना होता है तो उसे बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है. पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी के पास कई तरीके होते हैं, कंपनी चाहे तो बैंक से लोन भी ले सकती है, लेकिन ये तरीका कंपनी को थोड़ा महंगा पड़ता है क्योंकि इसमें कंपनी को ब्याज चुकाना होता है और समय पर लोन का भुगतान भी करना होता है. दूसरा तरीका IPO का है, जिसमें कंपनी अपना कुछ हिस्सा पब्लिक को बेचकर पैसा जुटाती है. इसमें कंपनियों को न तो कोई ब्याज देना होता है और न ही पैसे लौटाने होते हैं. लोगों को शेयर जारी करके वो कंपनी में उन्हें अपना हिस्सेदार बना लेती है. लेकिन IPO लाने के बाद कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. उन्हें कंपनी से जुड़े फैसलों के लिए शेयरधारकों की मंजूरियां लेनी होती हैं. वो कोई भी फैसला ऐसे नहीं कर सकतीं जिससे कंपनी के शेयरों में गिरावट आए और निवेशकों को नुकसान हो.
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