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अब NCLAT ने दिया सबसे बड़े सर्च इंजन को आदेश, 1 हफ्ते में भरें 10 प्रतिशत जुर्माना
CCI ने गूगल को अनुचित ट्रेड प्रैक्टिस में शामिल पाया था जिसके बाद उस पर बड़ा जुर्माना लगाया था. अब NCLAT ने उसे एक सप्ताह के अंदर 10 प्रतिशत जुर्माना भरने को कहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
टेक कंपनी गूगल की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक ओर कंपनी जहां ले ऑफ के कारण अपने कर्मचारियों की आलोचना का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके लिए भारत से भी बुरी खबर निकलकर सामने आई है. अब NCLAT ने भी CCI द्वारा लगाए गए जुर्माने को बरकरार रखा है और आदेश दिया है कि इसे एक सप्ताह के अंदर चुकाया जाए. सीसीआई ने गूगल पर अनुचित व्यापार प्रथाओं का दोषी पाते हुए 1,337.76 करोड़ रुपये के जुर्माना लगा दिया था जिसे अब NCLAT ने भी बरकरार रखा है.
क्या कहता है NCLT का आदेश
NCLAT ने Google को आदेश दिया है कि वो CCI द्वारा लगाए गए जुर्माने का 10% एक सप्ताह के अंदर जमा करे. ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि बाज़ार में Google के आचरण की CCI ने जो जांच की वो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं है. पहले मामले में, 20 अक्टूबर, 2022 को CCI ने 1,337 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और फिर 25 अक्टूबर को टेक प्रमुख पर 936 करोड़ रुपये का एक और जुर्माना लगाया था, जो कि अपने Android मोबाइल सिस्टम के संबंध में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करने के संबंध में था.
CCI ने दिया था सख्त निर्देश
CCI ने जो पेनाल्टी गूगल पर लगाई है वो कंपनी के भारत में विज्ञापन राजस्व का लगभग 9 प्रतिशत है. नियामक ने Google को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आचरण को सुधारने का भी निर्देश दिया था. सबसे शक्तिशाली कंपनियों में से एक के खिलाफ भारतीय नियामक की कड़ी कार्रवाई ने टेक दिग्गज के एकाधिकार और उसके नतीजों पर एक नई बहस छेड़ दी थी.
CCI से दिए कई अन्य आदेश
हालाँकि, तकनीकी दिग्गज कंपनी गूगल को CCI द्वारा जारी किए गए चार प्रमुख निर्देशों से भी राहत मिली है. यहां CCI के आदेश के पैरा 617.3, 617.9, 617.10 और 617.7 में आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं. इनमें अनुच्छेद 617.3 में कहा गया है कि Google मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम), ऐप डेवलपर्स और इसके मौजूदा या संभावित प्रतिस्पर्धियों को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी प्ले सेवाओं एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) तक पहुंच से इनकार नहीं कर सकता है. इसी तरह अनुच्छेद 617.7 में कहा गया है कि Google यूजर द्वारा अपने पहले से इंस्टॉल ऐप्स की स्थापना रद्द करने को प्रतिबंधित नहीं करेगा. यानी आप पहले से इंस्टॉल एप को डिलीट कर पाएंगे.
इसी तरह अनुच्छेद 617.9 में कहा है कि Google ऐप स्टोर के विकासकर्ताओं को Google Play Store के माध्यम से अपने ऐप स्टोर वितरित करने की अनुमति देगा. साथ ही अंतिम अनुच्छेद 617.10 में कहा गया है कि Google साइड-लोडिंग के माध्यम से अपने ऐप्स के डिस्ट्रीब्यूशन करने के लिए किसी भी तरीके से ऐप डेवलपर्स की क्षमता को प्रतिबंधित नहीं करेगा. टेक दिग्गज अब इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है.
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