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हर समस्‍या क्राइसेस नहीं होती है, आपको उसे पहचानना आना चाहिए 

सॉल्‍यूशन देने वाली एजेंसी पर कंपनी को पूरा विश्‍वास होना चाहिए. अगर एजेंसी पर कंपनी को विश्‍वास है तो वो निश्चित ही एक ईमानदार सॉल्‍यूशन देगा. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Business world के BW Marketing World के event में अलग-अलग क्षेत्रों कई कंपनियों के विशेष प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सभी ने क्राइसेस को कंट्रोल करने के अपने तरीके के बारे में विस्‍तार से बताया. इस पैनल में जिन मेहमानों ने भाग लिया उनमें PR Professional के COO, राहुल कश्‍यप मौजूद रहे वहीं MG Motor India की Manager Communications, सादिया खान और Mars Petcare India की Director, Corporate Affairs, आंचल जैन ने भाग लिया. सभी ने क्राइसेस को लेकर अपने अनुभव साझा किए और उससे निपटने के अपने तरीके के बारे में बताया. 

 सॉल्‍यूशन प्रोवाइडर पर विश्‍वास होना जरूरी 
PR Professional के COO, राहुल कश्‍यप ने कहा कि कोविड ने क्राइसेस को हाईलाइट किया है. तब से हम इस टर्म को लगातार सुन रहे हैं. मौजूदा समय में दुनिया में जो भी क्राइसेस आता है वो एक दूसरे से जुड़ा हुआ होता है. कोई भी क्राइसेस ऐसा नहीं होता है जो खुद से सामने आया हो. मेरी समझ से क्राइसेस की परिभाषा की बात करें तो उसे लेकर मेरी समझ ये है कि ये वो होता है जो बिना जानकारी के आ जाता है, और आप इसके लिए तैयार नहीं होते हैं.

जहां तक बात इसके समाधान की है तो मैं मानता हूं उसके लिए आपके पांव जमीन पर होने चाहिए.  राहुल कश्‍यप ने कहा कि एजेंसी और ब्रांच के संबंध में दोनों के बीच में तालमेल बहुत अहम होता है. ब्रांच को एजेंसी पर भरोसा होना चाहिए. अगर विश्‍वास है तो आप उन्‍हें एक ईमानदार सॉल्‍यूशन दे सकते हैं. कई बार मैंने देखा है कि वो इसे स्‍वीकार करने के लिए तैयार होते हैं. 

हर समस्‍या कोई क्राइसेस नहीं होती है
आंचल Mars Petcare India की Director, Corporate Affairs, आंचल जैन ने कहा कि हमारे फील्‍डर  में क्राइसेस कई तरह का हो सकता है. इस कई तरह के क्राइसेस में जैसे अगर मैं अपने फील्‍ड की बात करूं तो कई बार हमने ऐसा देखा कि नेगेटिव न्‍यूज को लेकर कई बार क्राइसेस आ जाता है तो उसे वैसे ही निपटाया जाता है,कई बार इस तरह का भी क्राइसेस होता है जिसमें आपका प्रतिद्ंदी आपके लिए चुनौती पैदा कर देता है. इस तरह का क्राइसेस एक टिपिकल क्राइसेस कहलाता है. मैं यहां पर ये भी कहना चाहूंगी कि हर तरह की समस्‍या क्राइसेस नहीं होती है.

अगर कोई समस्‍या हमारे लोगों को के लिए परेशानी बनती है तो वो क्राइसेस है, अगर कोई चीज हमारी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग को प्रभावित करती है तो वो क्राइसेस है, और या तो कोई क्राइसेस हमारी इमेज को प्रभावित कर रहा हो तो वो क्राइसेस होता है. ऐसे में हम उसे सेग्रीगेट करते हैं. अब आपने कहा कि इसमें क्‍या बदलाव आया है तो वो ये है कि क्राइसेस कई जगह से आ सकता है तो ऐसे में जरूरी ये है कि आप अपने स्‍टेकहोल्‍डर को किस तरह से उस क्राइसेस के बारे में बताते हैं. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर आपके सामने कोई जियो पॉलिटिकल समस्‍या आती है तो आप उसके लिए एक लॉन्‍ग टर्म समाधान तलाश करेंगे. 

हर क्राइसेस अलग तरह का होता है
MG Motor India की Manager Communications, सादिया खान कहती हैं कि हर क्राइसेस एक अलग तरह का होता है. अब जहां तक उस क्राइसेस के सॉल्‍यूशन की बात है तो मैं सबसे पहले उसकी जड़ में जाना पसंद करती हूं, जिससे उस समस्‍या को पूरी तरह से खत्‍म किया जा सके. उसके बाद मैं अपनी रणनीति बनाने पर विश्‍वास रखती हूं. अब मान लीजिए मैं ऑटोमोबाइल सेक्‍टर से आती हूं तो ऐसे में हमारे वहां कई बार नई टेक्‍नोलॉजी से जुड़े चैलेंज आ जाते हैं, क्‍योंकि हम जानते हैं कि टेक्‍नोलॉजी हर रोज बदल रही है तो ऐसे में ये एक परेशानी है जो आती है.

कई बार कस्‍टमर से जुड़ी परेशानी सामने आती है. अब सवाल ये है कि आखिर कैसे हम उस समस्‍या को दूर करते हैं. उस समस्‍या को हम ऐसे दूर करते हैं कि जिस तरह की भी समस्‍या सामने आई है तो हम उसके अनुसार एक्‍सपर्ट आदमी की टीम को तैयार करते हैं. सबसे अहम ये भी होता है कि आपकी रैपिड रिस्‍पांस सिस्‍टम भी उसमें बड़ी भूमिका निभाता है. कस्‍टमर सैटिस्‍फैक्‍शन भी उसमें बड़ी भूमिका निभाता है. 
 


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