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इसे कहते हैं बोल्ड डिसीजन, बेचने के बजाए Pawan Hans के पंख मजबूत करेगी सरकार
सहयोगियों के कंधे पर सवार मोदी सरकार इस बार विनिवेश को लेकर थोड़ी नरम नजर आ रही है. BPCL के बाद अब सरकार ने एक और कंपनी को बेचने का इरादा बदल दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
मोदी सरकार ने एक और कंपनी को बेचने की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है. हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया कराने वाली सरकारी कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) को निजी हाथों में सौंपने के बजाए अब सरकार उसकी माली हालात सुधारने पर फोकस करेगी. वैसे पिछले साल 'स्टार9 मोबिलिटी (Star9 Mobility)' कंसोर्टियम के अयोग्य घोषित होने से पवन हंस को बेचने की कोशिशों को झटका लगा था, लेकिन सरकार इसके विनिवेश पर कायम थी. हालांकि , अब एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मोदी सरकार पवन हंस में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बजाए कंपनी को मजबूत बनाएगी.
कितनी है सरकार की हिस्सेदारी?
पवन हंस सरकार और पब्लिक सेक्टर की कंपनी ONGC का एक ज्वाइंट वेंचर है. कंपनी में सरकार के पास 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष हिस्सा ONGC के पास है. मोदी सरकार ने पिछले साल पवन हंस को स्टार9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के कंसोर्टियम को 211.40 करोड़ रुपए में बेचने का फैसला लिया था. इस कंसोर्टियम में बिग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड, महाराजा एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और अल्मास ग्लोबल ऑपर्च्यूनिटी फंड SPC शामिल हैं. लेकिन कंपनी के खिलाफ लंबित कानूनी मामले के चलते उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया. इस वजह से सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी.
अब क्या है केंद्र की तैयारी?
सरकार अब पवन हंस की स्थिति में सुधार करना चाहती है. इसके लिए करीब 20 नए हेलीकॉप्टर खरीदने का प्रस्ताव है. मौजूदा वक्त में कंपनी के बेड़े में 46 हेलीकॉप्टर हैं. नई खरीद से इसका बेड़ा और मजबूत हो सकेगा. इसके अलावा, पवन हंस में पायलटों की नई भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. रिपोर्ट बताती है कि विमानन मंत्रालय ने पवन हंस से इन दिनों काम के लिए अनुमानित राशि बताने को कहा है.
कैसी है कंपनी की आर्थिक सेहत?
देश की इकलौती सरकारी हेलीकॉप्टर कंपनी पवन हंस की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी को 69 करोड़ और 2019-20 में करीब 28 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी. इसकी प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी थी. पवन हंस के लिए सबसे सफल बोली 'स्टार9 मोबिलिटी (Star9 Mobility)' कंसोर्टियम ने लगाई थी, लेकिन बनते-बनते बात बिगड़ गई. दरअसल, पिछले साल मई में यह बात सामने आई कि कंसोर्टियम की प्रमुख पार्टनर अल्मास ग्लोबल ऑपर्च्यूनिटी फंड SPC के खिलाफ नेशलन कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NLCT) में एक मामला लंबित है. इसके बाद बिक्री प्रक्रिया को रोक दिया गया.
फिर छू सकेगी आसमान
वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) की तरफ से तब कहा गया था कि सरकार ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेशों की पड़ताल करने के बाद पवन हंस के लिए सफल बोली लगाने वाली स्टार9 मोबिलिटी को विनिवेश प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित करने का फैसला लिया है. हालांकि, तीन दशक से भी पुरानी इस कंपनी के दिन अब बदल सकते हैं. यदि खबर के अनुसार सरकार इसकी माली हालात सुधारने पर फोकस करती है, तो कंपनी फिर से आसमान छू सकती है.
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