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नीति आयोग की EPI रैंकिंग: एक्सपोर्ट की दौड़ में महाराष्ट्र नंबर-1, छोटे राज्यों में उत्तराखंड आगे

EPI 2024 रैंकिंग साफ संकेत देती है कि भारत में निर्यात को लेकर राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है. महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जहां मजबूत स्थिति में हैं, वहीं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत के राज्यों की निर्यात तैयारियों को लेकर नीति आयोग ने एक्सपोर्ट प्रीपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 जारी कर दिया है. इस रैंकिंग में महाराष्ट्र देश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है. वहीं तमिलनाडु दूसरे, गुजरात तीसरे और उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर रहा है. यह रैंकिंग राज्यों की निर्यात क्षमता, नीतिगत ढांचे और कारोबारी माहौल के आधार पर तैयार की गई है.

बड़े राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में महाराष्ट्र ने सभी को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है. इसके बाद तमिलनाडु और गुजरात का नंबर आता है. उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर रहते हुए भी टॉप परफॉर्मिंग राज्यों की सूची में मजबूती से बना हुआ है. यूपी के बाद इस सूची में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब शामिल हैं.

छोटे राज्यों में उत्तराखंड का दबदबा

छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो उत्तराखंड ने पहला स्थान हासिल किया है. इसके बाद जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव और त्रिपुरा का स्थान है.

किन आधारों पर हुई रैंकिंग

इस इंडेक्स में राज्यों का मूल्यांकन चार प्रमुख मानकों पर किया गया है, जिसमें एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस इकोसिस्टम, पॉलिसी और गवर्नेंस व एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस को शामिल किया गया है. रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के सीईओ बी वी आर सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत लगातार कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट कर रहा है. ऐसे में देश और राज्यों के स्तर पर मजबूत निर्यात व्यवस्था होना बेहद जरूरी है.

राज्यों को अवसरों के लिए रहना होगा तैयार

नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने कहा कि राज्यों को चाहिए कि वे नए वैश्विक व्यापार अवसरों का पूरा लाभ उठाएं और अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दें. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के भीतर जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना समय की मांग है.


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