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बड़ा दावा: ‘इंफोसिस, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के फाउंडर्स भी कर चुके हैं मूनलाइटिंग’
हाल ही में IT कंपनी विप्रो ने मूनलाइटिंग करने वाले अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
'मूनलाइटिंग' का मुद्दा इस समय गर्माया हुआ है. जहां विप्रो, इंफोसिस जैसी कंपनियां इसके खिलाफ हैं. वहीं, मोदी सरकार के मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कर्मचारियों के पक्ष में बयान दिया है. IT मंत्रालय के राज्य मंत्री चंद्रशेखर का कहना है कि कर्मचारियों पर इस तरह शिकंजा कसना गलत है. इस बीच, IT कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन नेसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES) के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने बड़ा दावा किया है.
पुराना है इतिहास
एक मीडिया संस्थान से बातचीत में हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि इंफोसिस, फ्लिपकार्ट, फ्रेशडेस्क और कई अन्य सफल कंपनियों की स्थापना उनके फाउंडर्स ने मूनलाइटिंग करते हुए ही की थी. उन्होंने कहा, 'इतिहास उठाकर देख लीजिये, मूनलाइटिंग कोई नई बात नहीं है. जब नारायण मूर्ति ने इंफोसिस की स्थापना की थी, तब वह Patni Computer Systems के साथ काम कर रहे थे'.
दिए कई उदाहरण
सलूजा ने आगे कहा कि फ्लिपकार्ट की स्थापना सचिन और बिन्नी बंसल ने अमेज़न के लिए काम करने के दौरान की थी. इसी तरह, पिछले साल नैस्डैक में सूचीबद्ध की गई कंपनी फ्रेशडेस्क की स्थापना जब Girish Mathrubootham ने की, तब वह Zoho Corporation के साथ काम कर रहे थे. बता दें कि कई IT कंपनियों ने मूनलाइटिंग को नियमों का उल्लंघन करार देते हुए कर्मचारियों इससे दूर रहने की हिदायत दी है.
विप्रो ने निकाले 300 कर्मचारी
हाल ही में विप्रो (Wipro) ने अपने 300 कर्मचारियों को बगैर नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रिशद प्रेमजी का कहना था कि निकाले गए कर्मचारी विप्रो के साथ-साथ विरोधी कंपनी में भी काम कर रहे थे. इन वर्कर्स ने कंपनी इंटीग्रेशन का उल्लंघन किया, इसलिए हमने उनकी सर्विसेज टर्मिनेट कर दीं.
क्या कहा था चंद्रशेखर ने?
'पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (PAFI) के 9वें सत्र में राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को मूनलाइटिंग पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों पर शिकंजा नहीं कसना चाहिए. उन्हें अपने कर्मचारियों के सपनों पर रोक नहीं लगानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि आज वर्क कल्चर में बदलाव आया है और इसे पहचानने वाली कंपनियां सफल होंगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान कार्यबल के मनोविज्ञान रूप से बड़ा बदलाव आया है और कंपनियों को चाहिए कि इसका लाभ उठाएं, न कि इसे नज़रअंदाज करें.
आखिर क्या है मूनलाइटिंग?
मूनलाइटिंग का मतलब होता है नियमित नौकरी के साथ-साथ किसी तरह की अन्य नौकरी करना. उदाहरण के तौर पर आप एक कंपनी में काम करते हैं, उसके टाइमिंग के बाद आप एक्स्ट्रा कमाई के लिए कोई पार्ट-टाइम जॉब ढूंढ लेते हैं, तो उसे मूनलाइटिंग कहा जाएगा. अक्सर लोग नाइट और वीकएंड पर इस तरह की जॉब करते हैं. पश्चिमी देशों में तो लंबे समय से मूनलाइटिंग का कल्चर है. लेकिन, भारत में कोविड-19 महामारी के बाद से इसमें तेजी आई है. हालांकि, आईटी कंपनियों का मानना है कि इससे कर्मचारियों की परफॉर्मेंस और कामकाज पर असर पड़ रहा है.
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