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क्या वास्तव में पुलिस की नाक के नीचे से अयोध्या में चोरी हो गईं 50 लाख की लाइट्स?
अयोध्या में रामपथ और भक्तिपथ से 50 लाख रुपए की लाइट्स चोरी के मामले में नया मोड़ आया है. विकास प्राधिकरण ने बड़ा खुलासा किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
पिछले कुछ दिनों से अयोध्या 50 लाख रुपए की चोरी को लेकर खबरों में है. आरोप है कि राम मंदिर की ओर जाने वाले रामपथ और भक्तिपथ पर लगाई गईं 3800 बैम्बू लाइट और 36 गोबो प्रोजेक्टर पर चोरों ने हाथ साफ कर दिया है. अब चूंकि यह इलाका अयोध्या का सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित माना जाता है, इसलिए सवाल लाजमी है. इन लाइट्स की कीमत 50 लाख रुपए से ज्यादा है.
बदल गई पूरी तस्वीर
चोरी की खबर सामने आते ही अयोध्या पुलिस और प्रशासन सवालों के घेरे में आ गए. योगी सरकार पर भी विपक्ष के हमले शुरू हो गए. हालांकि, अब पूरी तस्वीर ही बदल गई है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अपनी जांच में पाया है कि आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और यह मामला धोखाधड़ी का है. इस संबंध में कंपनी के खिलाफ थाना राम जन्मभूमि में केस दर्ज करवाया गया है.
इन्हें मिला था ठेका
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने यश एंटरप्राइजेज और कृष्णा ऑटोमोबाइल्स को रामपथ के पेड़ों पर 6400 बैम्बू लाइट और भक्तिपथ पर 96 गोबो प्रोजेक्टर लाइट लगाने का ठेका दिया था. हाल ही में यश एंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि शेखर शर्मा ने रामजन्म भूमि थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने दावा किया था कि रामपथ और भक्तिपथ पर लगीं 50 लाख की कीमत वालीं लाइट्स चोरी हो गई हैं.
क्या था शिकायत में?
यश एंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि ने पुलिस को बताया था कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय रामपथ के पेड़ों पर 6400 बैम्बू और भक्तिपथ पर 96 गोबो प्रोजेक्टर लगाए थे, लेकिन 9 मई को निरीक्षण में पता चला कि इनकी संख्या आधे से भी कम हो गई है. इस खबर के सामने आते ही बवाल मचा गया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भी मामले को गंभीर बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, क्योंकि यह क्षेत्र हाई सिक्योरिटी जोन में आता है.
फर्जी भुगतान की साजिश
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन शुरुआत से ही चोरी के आरोपों से इंकार करता रहा. कमिश्नर गौरव दयाल ने बड़े पैमाने पर लाइटों की चोरी को असंभव बताया था. अब यही बात सच साबित हुई है. अयोध्या विकास प्राधिकरण का कहना है कि चोरी की बात पूरी तरह से गलत है. यह मामला धोखाधड़ी का है. प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र सिंह के अनुसार, फर्जी भुगतान के लिए यह प्रोपेगेंडा कंपनी द्वारा रचा गया, इसलिए उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है.
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