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भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी में नई तेजी, AI, मिनरल सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
राष्ट्रपति ली ने क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. उनका मानना है कि कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व रिफाइनिंग सेक्टर के मेल से एक मजबूत और स्थिर सप्लाई नेटवर्क तैयार किया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अहम मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं. इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल सप्लाई, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा.
राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में हुई इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापक मुद्दों पर चर्चा की. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने पौधारोपण कर साझेदारी के प्रतीकात्मक संदेश भी दिए. इससे पहले राष्ट्रपति ली ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी श्रद्धांजलि अर्पित की. राष्ट्रपति ली का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रापदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने उनका अभिनंदन किया. तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए ली रविवार को अपनी पत्नी किम हे-क्युंग के साथ नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका स्वागत केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया.
कूटनीतिक रिश्तों में ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’
मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के अनुसार यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है. दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते उच्च-स्तरीय संपर्क इस रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं.
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन पर फोकस
राष्ट्रपति ली ने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए स्ट्रेट ऑफ हार्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही कच्चे तेल और गैस के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, ऐसे में सुरक्षित सप्लाई चेन बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देश ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए मिलकर काम करेंगे.
क्रिटिकल मिनरल और इंडस्ट्रियल साझेदारी
राष्ट्रपति ली ने क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. उनका मानना है कि कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व रिफाइनिंग सेक्टर के मेल से एक मजबूत और स्थिर सप्लाई नेटवर्क तैयार किया जा सकता है. यह सहयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों के लिए अहम साबित हो सकता है.
AI, डिफेंस और टेक्नोलॉजी में नए मौके
दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, शिपिंग, शिपबिल्डिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. यह साझेदारी न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि रणनीतिक तालमेल को भी नई ऊंचाई देगी.
पहले भी हो चुकी हैं अहम मुलाकातें
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली की यह तीसरी आमने-सामने की बैठक है. इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात G20 समिट 2025 जोहनस्बर्ग और G7 समिट 2025 कनाडा के दौरान हो चुकी है. लगातार हो रही इन बैठकों से दोनों देशों के रिश्तों में गहराई और भरोसा बढ़ा है.
बहुआयामी साझेदारी की ओर कदम
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच रिश्तों पर भी आधारित हैं. यह दौरा इस बात का संकेत है कि दोनों देश न सिर्फ मौजूदा सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि नए क्षेत्रों में भी साझेदारी का विस्तार करने के लिए तैयार हैं.
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