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सर्कुलर इकॉनमी को नई रफ्तार: लॉन्च हुआ NCEF–3, अब 4 से बढ़कर 20 सामग्रियों पर फोकस
यह सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों की गहन समझ को बढ़ाएगा और भारत को “वेस्ट टू वर्थ” की दिशा में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत के संसाधन-कुशल और टिकाऊ सर्कुलर इकॉनमी की ओर बदलाव को तेज करने के लिए वेस्ट टू वर्थ टेक्नोलॉजी पर भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित 10वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में नेशनल सर्कुलर इकॉनमी फ्रेमवर्क (NCEF–3) के तीसरे संस्करण का शुभारंभ किया गया. यह फ्रेमवर्क भारत को संसाधन-कुशल और सतत सर्कुलर इकॉनमी की ओर ले जाने के प्रयासों को तेज करेगा. NCEF–3 में अब 20 प्राथमिक सामग्रियों को शामिल किया गया है और इसका ध्यान ठोस कार्यान्वयन, साफ नजर आने वाले नतीजों और जवाबदेही पर केंद्रित है, ताकि बड़े स्तर पर सर्कुलैरिटी को लागू किया जा सके.
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सीपीएचईईओ के सलाहकार (प्रभारी) वी. के. चौरसिया ने कहा कि कचरा प्रबंधन और सर्कुलैरिटी में वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उद्योग, नवप्रवर्तक और सरकार मिलकर सतत विकास के लिए एक सहयोगी ढांचा तैयार करें. वहीं, सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन वेस्ट टू वर्थ टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन और री-सस्टेनेबिलिटी के मेनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्रुप सीईओ मसूद मलिक ने कहा कि प्रसंस्करण और मूल्य सृजन को बेहतर बनाने की आवश्यकता है, जिससे भारत सतत और निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ सके. उन्होंने पारदर्शी सर्कुलैरिटी मापन प्रणाली की स्थापना, ग्रीन नौकरियों के सृजन और अंतरराष्ट्रीय मिशनों के माध्यम से वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया. मसूद मलिक ने आगे कहा कि भारत की संसाधन-कुशल और सर्कुलर इकॉनमी की यात्रा अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है. उन्होंने कहा, “एनसीईएफ न केवल यह बताता है कि क्या बदलना है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि एक मजबूत इंप्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क और स्पष्ट जवाबदेही संरचना के साथ बदलाव कैसे लागू किया जाएगा.”
टिकाऊ विकास की दिशा में भारत की अग्रणी भूमिका
इस अवसर पर मसूद मलिक ने बताया सीआईआई के वेस्ट टू वर्थ मूवमेंट के तहत यह फ्रेमवर्क कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और सर्कुलर सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. NCEF संस्करण 3 भारत की सर्कुलर इकॉनमी यात्रा में एक रणनीतिक मील का पत्थर है, जो न केवल आर्थिक लाभ बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और संसाधन सुरक्षा की दिशा में भी देश का नेतृत्व स्थापित करता है.
मसूद मलिक ने कहा कि 2023 में “नेशनल प्रेसिडेंट्स कन्वेंशन ऑन वर्क” का पहला संस्करण मूल रूप से केवल चार ही मटेरियल को कवर करता था. आज, इसका तीसरा संस्करण 20 प्राथमिक मटेरियल पर ध्यान केंद्रित करता है. इसमें न केवल रीसाइक्लिंग और वेस्ट रिकवरी की वर्तमान स्थिति को समझने पर जोर है, बल्कि भारत की आर्थिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपडेटेड गोल्स और मीट्रिक्स भी शामिल हैं. तीसरे संस्करण में हर मटेरियल के लिए स्पष्ट रूप से एक एक्शन प्लान विकसित किया गया है.
इस सम्मेलन के दौरान 'सीआईआई 4आर अवॉर्ड्स 2025' के छठे संस्करण में लगभग 50 संगठनों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने “रिड्यूस, रीयूज़, रीसायकल और रिपेयर (4R)” के क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व दिखाया. इस अवसर पर नवाचार आधारित सर्कुलर इकॉनमी मॉडल और स्केलेबल वेस्ट टू वर्थ समाधानों पर आधारित श्रेष्ठ प्रथाओं का संकलन (Compendium of Best Practices) भी जारी किया गया.
इस बार सम्मेलन में पहली बार 'यंग 4आर अवॉर्ड्स' की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं को सततता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रेरित करना है.
लगभग 10 संगठनों ने अपने “वेस्ट टू वर्थ” तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन भी किया. सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और अकादमिक चिंतक शामिल हुए. दिनभर चली चर्चाओं में शासन ढांचे, सर्कुलर इकॉनमी में बदलाव, तकनीकी नवाचार, सतत विकास के लिए बौद्धिक संपदा साझेदारी और कचरा प्रबंधन में उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ.
20 सामग्रियों पर केंद्रित व्यापक दृष्टिकोण
बता दें, इस फ्रेमवर्क का तीसरा संस्करण 20 प्रमुख सामग्रियों (फोकस मटेरियल्स) को शामिल करता है, जो पहले संस्करण के 4 और दूसरे के 16 फोकस मटेरियल्स से कहीं अधिक व्यापक है. पहले संस्करण (2023) में चार प्रमुख सामग्रियों प्लास्टिक, निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक कचरा और मिश्रित नगर निगम अपशिष्ट पर ध्यान केंद्रित किया गया था. दूसरे संस्करण (2024) में यह संख्या बढ़कर 16 हुई, जिसमें वस्त्र, एंड-ऑफ-लाइफ वाहन, बैटरी, खतरनाक कचरा, टायर और स्क्रैप मेटल शामिल थे. अब NCEF संस्करण 3 में कुल 20 सामग्री शामिल की गई हैं, जैसे कि यूज़्ड कुकिंग ऑयल, कैटालिटिक कन्वर्टर्स, पेपर और कार्डबोर्ड, तथा एब्ज़ॉर्बेंट हाइजीन प्रोडक्ट्स, यह विस्तार भारत की बदलती उपभोग प्रवृत्तियों, नई नीतिगत पहलों और तकनीकी प्रगति का प्रतिबिंब है.
नीति से क्रियान्वयन की दिशा में बदलाव
पहले दो संस्करणों ने सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा और सिद्धांतों को भारत के नीति और उद्योग जगत में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई. अब तीसरा संस्करण उस नींव पर आगे बढ़ते हुए क्रियान्वयन, परिणाम और जवाबदेही पर केंद्रित है.
प्रत्येक मटेरियल चैप्टर में चार मुख्य खंड शामिल हैं —
1. मटेरियल परिदृश्य और सर्कुलैरिटी बेसलाइन
2. चुनौतियाँ और अंतराल
3. लक्ष्य और विजन
4. इंप्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क और समर्थक नीतियाँ
टैग्स NCEF–3