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ED-IBBI के नए नियम: होमबायर्स और बैंकों को अब जल्दी और सुरक्षित संपत्ति वापसी की राहत
अब दिवालिया कंपनियों और उनके प्रमोटर्स की अटैच की गई संपत्तियों को प्रभावित पक्षों को लौटाने के लिए एक सरल और स्पष्ट प्रक्रिया लागू की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इंसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्टसी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) ने धोखाधड़ी का शिकार हुए होमबायर्स और बैंकों को बड़ी राहत देने के लिए नए नियम लागू किए हैं. अब ED के तहत अटैच की गई दिवालिया कंपनियों और उनके प्रमोटर्स की संपत्तियां प्रभावित पक्षों को वापस मिल सकेंगी. इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई गई है.
IBBI का नया सर्कुलर
IBBI ने 4 नवंबर, 2025 को इस संबंध में नया सर्कुलर जारी किया. यह कदम ED और IBBI के बीच कई मीटिंग्स और समन्वय के बाद लिया गया. नई व्यवस्था के तहत इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स (IPs) विशेष PMLA कोर्ट में स्टैंडर्ड अंडरटेकिंग दाखिल करेंगे. इसके बाद ED द्वारा अटैच की गई संपत्तियां रिलीज़ की जाएंगी और बैंक या होमबायर्स जैसे प्रभावित पक्षों को लौटाई जाएंगी.
### पहले की समस्या और नया समाधान
अभी तक कई मामलों में कॉर्पोरेट डेब्टर की संपत्तियां PMLA के तहत जब्त होने की वजह से दिवालियापन प्रक्रिया में उपयोग नहीं हो पा रही थीं. अब ED और IBBI ने इसके लिए एक सुव्यवस्थित तरीका तैयार किया है, जिससे परिसंपत्तियों की लिक्विडेशन प्रक्रिया के दौरान भी उन्हें क्रेडिटर्स को वापस किया जा सके.
PMLA के तहत आसान आवेदन प्रक्रिया
ED ने बताया कि अब PMLA के तहत धोखाधड़ी से प्रभावित लोग, जैसे बैंक और होमबायर्स अपनी संपत्ति वापस पा सकते हैं. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स अब PMLA की धारा 8(7) और 8(8) के तहत आवेदन करके ऐसी संपत्ति जारी कर सकते हैं.
केवल क्रेडिटर्स के हित में
इस नए तंत्र के तहत सुनिश्चित किया जाएगा कि लौटाई गई संपत्ति सिर्फ क्रेडिटर्स के लाभ के लिए इस्तेमाल हो. आरोपी या प्रमोटर्स को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा. पूरी रिपोर्टिंग और अनुपालन प्रक्रिया तब तक लागू रहेगी जब तक मामला पूरी तरह से निपट न जाए.
ED और IBC का तालमेल
एजेंसी ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि PMLA के तहत कड़ी कार्रवाई और IBC के तहत संपत्ति की अधिकतम वसूली एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं. सही तालमेल से दोनों का उपयोग करके आर्थिक अपराधियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है और सार्वजनिक व क्रेडिटर्स के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है.
ED ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों को उनके अपराध की संपत्ति का लाभ उठाने से रोकना और क्रेडिटर्स के लिए वसूली बढ़ाना है. साथ ही, यह नया सरल तंत्र कोर्ट में लंबित मुकदमों को जल्दी निपटाने में मदद करेगा.
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