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भारत की ग्रोथ को लेकर Moody's ने जताया अनुमान, जानते हैं क्या कहा है इस स्ंस्था ने?
मूडीज ने जो अनुमान जताया है उसके अनुसार, अगले कुछ महीने में होने वाले आम चुनावों के बाद ही यही पॉलिसी जारी रहने वाली हैं. ऐसे में कैपिटल एक्सपेंडिचर में और इजाफा हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर वैसे तो दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं का अनुमान बेहतर ही रहता है. एक बार फिर इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने भारत की इकोनॉमी को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है. मूडी का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था इस साल 6.8 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ आगे बढ़ने वाली है. मूडीज इससे पहले वर्ष 2024 के लिए इससे कम अर्थव्यवस्था के आंकड़ों का अनुमान जता चुका है.
2023 में भारत की ग्रोथ रेट रही 7.7 प्रतिशत
कुछ दिन पहले सरकार की ओर से तीसरी तिमाही की जो ग्रोथ रेट सामने आई वो 8.4 प्रतिशत रही. उसके अनुसार देश की ग्रोथ रेट अब तक 7.7 प्रतिशत रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मूडीज के निवेशकों का कहना है कि इसके कारणों में भारत सरकार के द्वारा कैपिटल एक्सपेंडीचर में इजाफा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी के कारण ये नतीजे देखने को मिले हैं. मूडीज का ये भी मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की इकोनॉमी 6 से 7 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ने में सफल रहेगी.
2024 में रहेगी इकोनॉमी की ये स्पीड
मूडीज के अनुसार देश में 2024 में ग्रोथ रेट का जो आंकड़ा रह सकता है वो 6.8 प्रतिशत तक रह सकता है. हालांकि मूडीज ने इससे पहले 2024 के लिए ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.1 प्रतिशत रखा था. इस अनुमान को बढ़ाने को लेकर मूडीज ने 2023 में भारत की अर्थव्यवस्था के बेहतर आंकड़ों का हवाला दिया है. मूडीज का ये भी मानना है कि जी 20 देशों में भारत की इकोनॉमी जी 20 देशों में सबसे बेहतर बनकर सामने आएगी. मूडीज ने ये बात ग्लोबल माइक्रोइकोनॉमिक आउटलुक 2024 में कही है.
इन कारणों का दिया है हवाला
मूडीज का मानना है कि ग्रोथ में अनुमान के जो कारण हैं उनमें देश में ऑटो सेक्टर में हो रहा विकास, सर्विस टैक्स कलेक्शन, देश के कंज्यूमर का आशावादी होना, और कर्ज बढ़ोतरी के दोहरे आंकड़े से पता चलता है कि शहरी कस्टमर की मांग बेहतर बनी हुई है. वहीं अगर सप्लाई साइड पर नजर डालें तो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के पीएमआई में हुआ विस्तार भी इसकी एक प्रमुख वजहों में शामिल है. सरकार ने इस साल कैपिटल एक्सपेंडीचर पर 11 प्रतिशत से ज्यादा का खर्च किया है. ये देश की जीडीपी का 3.4 प्रतिशत है. जबकि माना जा रहा है कि 2025 में ये बढ़कर 16.9 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच जाएगा. मूडीज का मानना है कि ये पॉलिसी आम चुनावों के बाद भी जारी रहेगी.
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