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मोहनदास पई ने GST सिस्टम की कड़ी आलोचना की, कहा- ‘यह उलझा हुआ और बेकार है’
पई ने कहा कि यह सिस्टम आम नागरिकों को "घूसखोरी करने वाले अधिकारियों का बंधक" बना रहा है और विवादों का अंतहीन सिलसिला शुरू कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम पर अब कड़ी आलोचना हो रही है. इंफोसिस के पूर्व CFO और एरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पई ने इस पर खुलकर नाराज़गी जताई है. पई ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि मौजूदा GST सिस्टम "उलझा हुआ और बेकार" है और इसे "टैक्स आतंकवाद" का कारण बताया. उन्होंने कहा कि यह सिस्टम आम नागरिकों को "घूसखोरी करने वाले अधिकारियों का बंधक" बना रहा है और विवादों का अंतहीन सिलसिला शुरू कर रहा है. पई ने सरकार से साफ कहा, "GST को सरल बनाना जरूरी है, या नहीं."
This is silly and complex. Will lead to tax terrorism. @narendramodi @PMOIndia @nsitharaman @FinMinIndia citizens are becoming victims of bad policy which will make them hostages to rent seeking officials and create disputes GST needs to be simplified, not this https://t.co/wYAeuCz58x
— Mohandas Pai (@TVMohandasPai) December 22, 2024
पई के कड़े शब्दों से पहले पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी GST सिस्टम की आलोचना की थी. उन्होंने इसे "राष्ट्रीय त्रासदी" कहा और कहा कि यह टैक्स सिस्टम अपने "गुड एंड सिंपल टैक्स" (अच्छा और सरल टैक्स) के वादे से भटक गया है. सुब्रमण्यन ने सरकार को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि GST की जटिलता और सख्ती बढ़ा दी गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि भारत "अव्यवस्था और भ्रम" की ओर बढ़ रहा है और इसे "दुखद स्थिति" बताया.
यह आलोचना 55वीं GST काउंसिल की बैठक के बाद आई, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की. बैठक में कुछ फैसले जैसे फोर्टिफाइड चावल पर GST को घटाकर 5% करना और जीन थैरेपी को टैक्स से छूट देना सकारात्मक माने गए, लेकिन कुछ अन्य फैसलों की आलोचना हुई. सबसे विवादित निर्णय कैरामलाइज्ड पॉपकॉर्न पर 18% GST लगाना था, जबकि नमकीन पॉपकॉर्न पर 12% टैक्स ही है. सुब्रमण्यन जैसे आलोचकों ने इसे सिस्टम की बेतुकी स्थिति का उदाहरण बताया.
इसके अलावा, पुरानी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री पर GST से छूट और 2000 रुपये से कम के लेन-देन पर पेमेंट एग्रीगेटर्स को राहत जैसे कदमों से और उलझन बढ़ गई. वहीं, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी चार्ज पर टैक्स को टालने के फैसले ने कारोबारियों को असमंजस में डाल दिया, इससे नाराजगी और बढ़ गई.
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