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सरकारी कंपनियों ने भर दी Modi सरकार की तिजोरी, मिला उम्मीद से ज्यादा 

मोदी सरकार को सार्वजनिक कंपनियों से डिविडेंड के रूप में अच्छी-खासी कमाई हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आमतौर पर जिन सरकारी कंपनियों के कामकाज पर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं, उन्होंने मोदी सरकार (Modi Government) की तिजोरी भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार को सार्वजनिक कंपनियों से डिविडेंड के रूप में वित्त वर्ष 2023-24 में शानदार कमाई हुई है. कमाई का आंकड़ा संशोधित लक्ष्य को पार कर गया है. विनिवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान सरकार को लाभांश यानी डिविडेंड के रूप में सरकारी कंपनियों से 62,929.27 करोड़ रुपए मिले, जो संशोधित लक्ष्य से करीब 26 फीसदी अधिक है.

इस वजह से हुआ लाभ
सरकार को मिले अनुमान से अधिक लाभांश की वजह कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन के साथ-साथ 2020 में पेश की गई सतत लाभांश नीति भी है, जिसके तहत सरकार द्वारा संचालित कंपनियों को वार्षिक भुगतान की जगह अंतरिम लाभांश का भुगतान करना होता है. वित्त वर्ष 2024 की शुरुआत में 43,000 करोड़ रुपए लाभांश का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित करके 50,000 करोड़ रुपए कर दिया गया. सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 के लिए लाभांश 48,000 करोड़ रुपए रह सकता है.

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यहां, पूरा नहीं हुआ लक्ष्य
लाभांश जरूर सरकार के अनुमान से अधिक रहा है, लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सरकार ने विनिवेश का जो लक्ष्य रखा था, वो पूरा नहीं हो सका है. सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में विनिवेश से लगभग 16,507.29 करोड़ रुपए हासिल किये हैं. जबकि साल की शुरुआत में सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया से 51,000 करोड़ रुपए आने का अनुमान लगाया था. सरकार अगले साल से विनिवेश के लिए कोई खास लक्ष्य निर्धारित करने से फिलहाल बच रही है. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद इस दिशा में काम किया जाएगा.

इसलिए धीमी हुई रफ्तार
सरकार ने पहले कई कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की इच्छा जताई थी. कुछ को सही खरीदार नहीं मिले और बाकी की प्रक्रिया चुनावी मौसम में धीमी पड़ गई. दरअसल, विनिवेश को लेकर सरकारी कर्मचारियों में नाराजगी है, ऐसे में मोदी सरकार चुनाव के दिनों में कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहती. पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और अब लोकसभा चुनाव होने हैं. इस वजह से हिस्सेदारी बेचने से जुड़े प्रमुख लेनदेन टाल दिए गए हैं. उदाहरण के लिए,  सरकार ने IDBI बैंक, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, NMDC स्टील, बीईएमएल में हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में बेचने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उसे टाल दिया गया. 

 
 


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