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प्राइवेटाइजेशन पर एक राह नहीं पकड़ पा रही Modi सरकार, अब सामने आई ये खबर
लोकसभा चुनाव के नतीजों ने मोदी सरकार के लिए बहुत कुछ बदल दिया है. वो निजीकरण को लेकर कोई एक राह नहीं पकड़ पा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सरकारी कंपनियों को बेचने, तकनीकी भाषा में कहें तो विनिवेश को लेकर मोदी सरकार कोई एक राह नहीं पकड़ पा रही है. कभी सरकार विनिवेश पर अपने कदम रोक लेती है, तो कभी उसके आगे बढ़ने की खबर आती है. अब एक रिपोर्ट बताती है कि मोदी सरकार कम से कम 8 कंपनियों को बेचने की तैयारी कर रही है. ये सभी कंपनियां एग्रीकल्चर से जुड़ी हुई हैं. लोकसभा चुनाव से पहले तक सरकार की विनिवेश की लिस्ट में अलग-अलग सेक्टर की कई कंपनियां थीं, जिसमें BPCL और IDBI बैंक टॉप पर थे. BPCL को बेचने का मन सरकार बदल चुकी है और IDBI बैंक को लेकर भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं.
बंद यूनिट फिर से होंगी शुरू
रिपोर्ट की मानें, तो अगले वित्त वर्ष में मोदी सरकार आठ सरकारी फर्टिलाइजर कंपनियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. साथ ही बंद पड़ी कुछ यूनिट को फिर से शुरू करने की भी योजना है. 2022 में नीति आयोग ने 8 फर्टिलाइजर कंपनियों में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने के लिए चिह्नित किया था. लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद भी सरकार को मन मुताबिक डील नहीं मिल पाई. इसके बाद कुछ वक्त के लिए सरकार खामोश बैठ गई. अब उसने फिर से इस दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया है.
लिस्ट में शमिल हैं ये कंपनियां
मोदी सरकार जिन कंपनियों को फिलहाल बेचना चाहती है, उनमें राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइजर (RCF), नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (NFL), फर्टिलाइजर एंड केमिकल त्रावणकोर लिमिटेड (FACT), ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्प लिमिटेड, एफसीआई अरावली जिप्सम एंड मिनरल्स लिमिटेड, फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान फर्टिलाइजर्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और मद्रास फर्टिलाइजर्स लिमिटेड शामिल हैं. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस योजना पर चर्चा चल रही है और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
विरोध में रहे हैं सहयोगी दल
मोदी सरकार के परेशानी ये है कि वो इस बार सहयोगियों के कंधों पर सवार. सहयोगी भी ऐसे जो पूर्व में विनिवेश का विरोध कर चुके हैं. करीब तीन साल पहले यानी 2021 में तेलुगू देशम पार्टी (TDP) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) ने केंद्र के राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (National Steel Corporation Limited) के निजीकरण के फैसले का विरोध किया था. उन्होंने बाकायदा PM मोदी को पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जताई थी और निजीकरण रोकने की अपील की थी. इसी तरह, जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य नीतीश कुमार रेलवे के निजीकरण के विरोधी रहे हैं. उन्होंने कई मौकों पर खुलकर अपना विरोध भी जाहिर किया है. 2019 ने नीतीश कुमार ने कहा था कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए. ऐसे में सरकार खुलकर इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रही है.
इस बात का रखा जा रहा ख्याल
मोदी सरकार विनिवेश को लेकर ऐसी कंपनियों का चुनाव कर रही है, जिनके बिकने पर बड़े पैमाने पर विरोध न हो. साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि विनिवेश यानी प्राइवेटाइजेशन के फैसले का सहयोगी दलों के राज्यों पर सीधा प्रभाव न हो. माना यह भी जा रहा है कि अगर फर्टिलाइजर कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने पर सहयोगी दल आपत्ति जताते हैं, तो सरकार अपना इरादा बदल भी सकती है. हाल ही में खबर आई थी कि मोदी सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) को बेचने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. सरकार अब इस कंपनी को निजी हाथों में सौंपने के बजाए उसकी माली हालात सुधारने पर फोकस करेगी. पवन हंस सरकार और पब्लिक सेक्टर की कंपनी ONGC का एक ज्वाइंट वेंचर है. कंपनी में सरकार के पास 51% हिस्सेदारी है जबकि शेष हिस्सा ONGC के पास है.
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