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जिस कंपनी में Modi सरकार बेच रही हिस्सेदारी, उसके शेयरों में आई गिरावट भारी 

मोदी सरकार रेलवे से जुड़ी एक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने जा रही है. माना जा रहा है कि चुनावी जीत से उत्साहित सरकार विनिवेश प्रक्रिया में तेजी ला सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों से उत्साहित मोदी सरकार (Modi Government) विनिवेश यानी डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) पर तेजी से आगे बढ़ सकती है. इस बीच, इरकॉन में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इरकॉन इंटरनेशनल (IRCON International) में 8 प्रतिशत तक हिस्सेदारी गुरुवार यानी आज से शुरू हो रही बिक्री पेशकश के जरिए बेचेगी. इस डील से सरकार की झोली में करीब 1,100 करोड़ रुपए आएंगे. वहीं, सरकार के इस फैसले से IRCON के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है.

गोता लगा रहे कंपनी के शेयर
रेलवे से जुड़ी कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल के शेयर आज बड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. दोपहर 12 बजे तक कंपनी के शेयरों में 7.39% की गिरावट आ गई थी. जबकि बीते 5 दिनों में ये शेयर 7.84% लुढ़क चुका है. हालांकि, पिछले छह महीनों में 159.60 रुपए के भाव पर मिल रहे इरकॉन के शेयरों ने 83.98% का रिटर्न भी दिया है. रिपोर्ट्स में निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय के हवाले से बताया गया है कि गैर-खुदरा निवेशकों के लिए इरकॉन में बिक्री पेशकश बृहस्पतिवार को खुलेगी. खुदरा निवेशक इसमें शुक्रवार को बोली लगा सकते हैं. 

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क्या है सरकार की योजना?
सरकार इरकॉन में 8 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 7.53 करोड़ इक्विटी शेयरों को 154 रुपए प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर बेचेगी. यदि यह बिक्री पेशकश  पूरी तरह सफल होती है, तो सरकारी खजाने में लगभग 1,100 करोड़ रुपए आएंगे. रेल इंजीनियरिंग एवं निर्माण कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल में सरकार के पास कुल 73.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है. फिलहाल सरकार इसमें से 8% हिस्सेदारी बेच रही है. क्या सरकार कंपनी में और भी हिस्सेदारी बेचेगी, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है. बता दें कि चालू वित्त वर्ष में सरकार ने अब तक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में कुछ हिस्सेदारी बेचकर 8,859 करोड़ जुटाए हैं. वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में सार्वजनिक उद्यमों के विनिवेश से 51,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके पूरा होने की उम्मीद कम ही है.


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