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AI के खतरों को लेकर Microsoft, Google के CEO से इस राष्‍ट्रपति ने की मुलाकात 

जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस साल अपने लॉन्‍च से लेकर आगे के सफर तक चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन अब इसकी सुरक्षा को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई है. जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. 

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर पिछले लंबे समय से काफी उत्‍साह बना हुआ है. एक ओर जहां गूगल और माइक्रोसॉफ्ट में होड़ मची है वहीं दूसरी ओर कई इसके जानकारों ने इसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल पैदा किया है. इसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. उसी को लेकर अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने इस तकनीक पर काम कर रही दोनों कंपनियों गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ से मुलाकात की है. उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्‍पाद बाजार में आने से पहले सुरक्षित हों. 

लगातार बढ़ रही है इसकी मांग 
दरअसल जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस साल शुरुआत से ही चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें चैटजीपीटी जैसे ऐप जनता को आकर्षित कर रहे हैं. इसी को बनाने वाली  कंपनियों के बीच इसी तरह के उत्पादों को लॉन्च करने के लिए लगातार भीड़ बढ़ रही है,  उनका मानना है कि इससे काम करने का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा. 
इस तकनीक के लाखों इस्‍तेमाल करने वालों ने इनकी टेस्टिंग करनी भी शुरू कर दी है. उनका मानना है कि ये चिकित्‍सा क्षेत्र में काम कर सकते हैं, स्‍टोरी लिख सकते हैं, यही नहीं ये कानूनी ब्रीफिंग भी आसानी से कर सकते हैं. लोगों के इसी बढ़ते उत्‍साह ने तकनीक के जानकारों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं इससे निजता का उल्‍लंघन न होने लगे और कहीं इससे रोजगार तो प्रभावित नहीं होने जा रहा है और इसके जरिए गलत सूचना का कैंपेन चलाया जा सकता है. जो सभी के लिए नुकसानदायक है. 

जो बाइडेन ने मुलाकात में क्‍या कहा 
गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के साथ मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस ने इस पर बयान जारी किया है. व्‍हाइट हाउस ने कहा कि इस मुलाकात में बाइडेन ने कहा कि जिन्होंने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया है और इसका प्रयोग किया है, उन लोगों को एआई द्वारा व्यक्तियों, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मौजूदा और संभावित खतरों को कम करने को लेकर काम करना चाहिए. उन्‍होने बैठक में कंपनियों को अपने एआई सिस्टम के बारे में पॉलिसी मेकरों के साथ अधिक पारदर्शी होने की आवश्यकता पर स्पष्ट और रचनात्मक बातचीत हुई.

उन्‍होंने ऐसे उत्पादों की सुरक्षा के मूल्यांकन के महत्व और उन्हें दुर्भावनापूर्ण हमलों से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया है. इस बैठक में Google के सुंदर पिचाई, Microsoft कॉर्प के सत्या नडेला, OpenAI के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदी के साथ-साथ उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और बॉइडेन के चीफ ऑफ स्टाफ सहित प्रशासन के अधिकारी शामिल थे. जेफ ज़िएंट्स, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन, राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक लेल ब्रेनार्ड और वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो भी इस मीटिंग में शामिल थी. 

मुलाकात पर क्‍या बोली उपराष्‍ट्रपति 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मुलाकात पर उपराष्‍ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि तकनीक के जरिए जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता है,  लेकिन यह सुरक्षा, गोपनीयता और नागरिक अधिकारों की चिंता पैदा कर सकती है. उन्होंने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से कहा कि उनके पास अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी जिम्मेदारी है और प्रशासन नए नियमों को आगे बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नए कानून का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या सभी कंपनियां रेग्‍यूलेशन को लेकर सभी लोग तैयार हैं तो ऑल्टमैन ने बैठक के बाद कहा कि हम सभी इसके बारे में एक जैसा सोचते हैं कि क्या होना चाहिए.

अमेरिकी प्रशासन ने सात नए एआई अनुसंधान संस्थानों को लॉन्च करने के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन से 140 मिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है और कहा कि व्हाइट हाउस का प्रबंधन और बजट कार्यालय संघीय सरकार द्वारा एआई के उपयोग पर पॉलिसी मार्गदर्शन जारी करेगा. एंथ्रोपिक, गूगल, हगिंग फेस, एनवीडिया कॉर्प, ओपनएआई और स्टेबिलिटी एआई सहित प्रमुख एआई डेवलपर्स अपने एआई सिस्टम के सार्वजनिक मूल्यांकन में भाग लेंगे.
 


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