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Moonlighting पर चल रही बहस पर बोले सत्या नडेला, 'कर्मचारियों पर जासूसी करना सही नहीं'
. नडेला के अनुसार, 'आलसी कर्मचारियों' के बारे में प्रबंधकों की बढ़ती सोच उत्पादकता पागलपन की ओर ले जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः 'मूनलाइटिंग' पर चल रही बहस के बीच माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने बहस में पड़ते हुए कहा है कि कर्मचारियों की जासूसी करना सही नहीं है. नडेला के अनुसार, 'आलसी कर्मचारियों' के बारे में प्रबंधकों की बढ़ती सोच उत्पादकता पागलपन की ओर ले जा रही है.
हाइब्रिड वर्किंग पर कंपनी नहीं कर पा रही है भरोसा
उनके मुताबिक, रिमोट वर्किंग या हाइब्रिड वर्किंग के बीच अब उत्पादकता का व्यामोह उभर रहा है. उन्होंने कहा, रिमोट वर्किंग के मामले में प्रबंधन और प्रबंधक दूर से काम करने वाले कर्मचारियों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि दूसरी तरफ कर्मचारी खुद को दबाव में महसूस कर रहे हैं. भरोसे की इस कमी ने काम के माहौल में अजीबोगरीब पागलपन पैदा कर दिया है.
माइक्रोसॉफ्ट के सर्वे का जिक्र किया
दरअसल नडेला ने ये बयान माइक्रोसॉफ्ट के एक सर्वे के नतीजों के बाद दिए हैं. सर्वे के मुताबिक, मैनेजर इस बात पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं कि कर्मचारी कंपनी के साथ पूरी क्षमता से घर पर रिमोट वर्किंग से काम कर रहा है. नडेला के अनुसार, 'आलसी कर्मचारियों' के बारे में प्रबंधकों की बढ़ती सोच उत्पादकता पागलपन की ओर ले जा रही है. नडेला ने कहा कि ऐसे में कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए जासूसी करने से हालात और बिगड़ेंगे जो पूरी तरह गलत है.
वर्कप्लेस पर अजीब हो रही है स्थिति
दरअसल, माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख के मुताबिक एक तरफ प्रबंधक कर्मचारियों से काम करवा रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ उन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. इससे वर्कप्लेस पर स्थिति अजीब हो जाती है. माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि वे ऐसे टूल्स को अपना रहे हैं ताकि मैनेजर और कर्मचारी एक दूसरे से बेहतर तरीके से जुड़ सकें. हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे कर्मचारियों पर कड़ी नजर रखने को उत्पादकता बढ़ाने का सही तरीका नहीं मानते हैं.
ये है मूनलाइटिंग का मतलब
अब ये भी समझ लेते हैं कि आखिर मूनलाइटिंग होता क्या है? मूनलाइटिंग का मतलब होता है नियमित नौकरी के साथ-साथ किसी तरह की अन्य नौकरी करना. उदाहरण के तौर पर आप एक कंपनी में काम करते हैं, उसके टाइमिंग के बाद आप एक्स्ट्रा कमाई के लिए कोई पार्ट-टाइम जॉब ढूंढ लेते हैं, तो उसे मूनलाइटिंग कहा जाएगा. अक्सर लोग नाइट और वीकएंड पर इस तरह की जॉब करते हैं. पश्चिमी देशों में तो लंबे समय से मूनलाइटिंग का कल्चर है. लेकिन, भारत में कोविड-19 महामारी के बाद से इसमें तेजी आई है.
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