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माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की ग्रोथ रिपोर्ट जारी: 91% ऋण आजीविका से जुड़ी जरूरतों में इस्तेमाल

भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 यह स्पष्ट करती है कि माइक्रोफाइनेंस केवल ऋण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि आजीविका और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त औजार बन चुका है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की ताजा तस्वीर सामने आई है. दरअसल, सा-धन और नाबार्ड द्वारा जारी भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक इस सेक्टर का कुल बकाया ऋण ₹3.81 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि सक्रिय ग्राहक आधार 8.28 करोड़ रहा. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुल ऋण का लगभग 91% हिस्सा आय-सृजन गतिविधियों जैसे छोटे व्यापार, कृषि, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार में लगाया गया.

91% ऋण से जुड़ी आमदनी, प्रति उधारकर्ता औसत बकाया ₹38,005

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक उधारकर्ता पर औसतन ₹38,005 का बकाया रहा, जिसमें से लगभग 91% ऋण का उपयोग आय-सृजन गतिविधियों के लिए किया गया. इसका मतलब यह है कि अधिकांश लाभार्थी ऋण को छोटे व्यवसाय, कृषि, कुटीर उद्योग या अन्य स्वरोजगार गतिविधियों में लगा रहे हैं.

ऋण में गिरावट, लेकिन SHG लिंकिंग में सकारात्मक ग्रोथ

हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सक्रिय क्लाइंट बेस और कुल ऋण वितरण में क्रमश: 13% और 14% की गिरावट दर्ज की गई. इसके पीछे इंडस्ट्री द्वारा लगाए गए नियामक गार्डरेल्स और उधारी पर नियंत्रण कारण रहे. दूसरी ओर, स्वयं सहायता समूह (SHG) बैंक लिंकेज कार्यक्रम ने इस दौरान मजबूती दिखाई. 84.94 लाख SHGs को क्रेडिट से जोड़ा गया और कुल बकाया ₹3.04 लाख करोड़ तक पहुंच गया. नाबार्ड के अनुसार, देशभर में 143.3 लाख SHGs में लगभग 17.1 करोड़ परिवार बचत से जुड़े रहे.

संस्थागत हिस्सेदारी का विश्लेषण

रिपोर्ट में 31 मार्च 2025 तक कुल 13.99 करोड़ ऋण खाते दर्ज किए गए. इन खातों में प्रमुख हिस्सेदारी एनबीएफसी-एमएफआई (39%), बैंकों (32%), स्मॉल फाइनेंस बैंकों (16%), एनबीएफसी (12%) और अन्य संस्थानों (1%) की रही. इसी क्रम में ऋण बकाया का वितरण भी इन्हीं अनुपातों में रहा.

ऋण बकाया में एनबीएफसी-एमएफआई का योगदान ₹1.48 लाख करोड़, बैंकों का ₹1.24 लाख करोड़, एसएफबी का ₹59,817 करोड़, एनबीएफसी का ₹45,042 करोड़ और अन्य का ₹3,516 करोड़ रहा.

रिपोर्ट ने खोले डेटा के नए आयाम

यह रिपोर्ट क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों और 203 माइक्रो लेंडिंग संस्थानों (MLIs) से लिए गए आंकड़ों पर आधारित है, जो देश के लगभग 98% माइक्रोफाइनेंस बिजनेस को कवर करते हैं. रिपोर्ट न केवल सेक्टर की मौजूदा स्थिति को दर्शाती है, बल्कि इसकी गुणवत्ता और सामाजिक प्रभाव को भी उजागर करती है.

नाबार्ड और सा-धन ने क्या कहा?

नाबार्ड के चेयरमैन शाजी के.वी. ने कहा, "माइक्रोफाइनेंस भारत के सामाजिक और आर्थिक बदलाव का एक मजबूत आधार बन चुका है. इसने वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाया है और महिलाओं, सीमांत किसानों, कारीगरों तथा अन्य वंचित समुदायों को सशक्त किया है. बिना किसी गिरवी के लाखों लोगों को समय पर ऋण मिल पाया है, जिससे उन्होंने स्थायी आय के स्रोत और उद्यम खड़े किए हैं. यह रिपोर्ट ‘विकसित भारत’ की दिशा में हमारे सामूहिक प्रयासों को मजबूती देती है."

सा-धन के सीईओ जी.जी. मम्मेन ने कहा, "माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में सबसे बड़ी चुनौती क्रेडिट ओवर-लेवरेजिंग की रही है, जो बढ़ते उधारी जोखिम और अधिक ऋणदाताओं के कारण सामने आई. इसी को देखते हुए इंडस्ट्री में दो चरणों में ऋण नियंत्रण से जुड़े गार्डरेल्स लागू किए गए – पहला जुलाई 2024 में और दूसरा अप्रैल 2025 में. इन प्रतिबंधों के चलते ही इस वर्ष सेक्टर में नकारात्मक ग्रोथ देखी गई. हालांकि, रिपोर्ट में यह संकेत भी है कि 2025-26 में सेक्टर फिर से गति पकड़ सकता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में ऋण का इस्तेमाल उत्पादक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है."

 


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