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राखी के त्योहार से बाजार गुलजार, इस बार हुआ 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार
कैट के अनुसार, रक्षा बंधन से लेकर तुलसी विवाह के दिन तक फेस्टिव सीजन के दौरान लगभग 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देशभर में 19 अगस्त को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जा रहा है. इस त्यौहार के साथ ही बिजनेस और व्यापारियों का फोकस रक्षाबंधन के मौके पर होने वाली बिक्री पर है. बहन और भाई के रिश्ते से जुड़े इस त्यौहार में गिफ्ट, मिठाई और पारंपरिक तौर पर राखी बांधने का चलन है. लेकिन, कमर्शियल सेक्टर पर भी इसका पॉजिटिव असर देखने को मिलता है. इंडस्ट्री के एक अनुमान के मुताबिक, इस साल रक्षाबंधन से जुड़ा व्यापार ₹12,000 करोड़ पर पहुंच चुका है. इसमें कपड़े, ज्वैलरी, गिफ्ट और डेकोरेशन जैसे कारोबार शामिल हैं.
राखी पर देश भर के बाजारों में जबरदस्त भीड़
व्यापारियों के शीर्ष संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा है कि इस वर्ष राखी के त्यौहार पर देश भर के बाजारों में जबरदस्त भीड़ है. लोगों में उत्साह देखा जा रहा है. पिछले कई वर्षों से देश में स्वदेशी राखियों ही बिक रही हैं. इस वर्ष भी चीन की बनी राखियों की डिमांड नहीं है. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री तथा चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया की राखियों की डिमांड को देखते हुए इस साल 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है. पिछले साल यह आंकड़ा लगभग 10 हजार करोड़ रुपये था. कैट के अनुसार, रक्षा बंधन से शुरू होकर 15 नवंबर को तुलसी विवाह के दिन तक त्योहारी सीजन में बाजारों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है.
किस वर्ष कितने करोड़ का हुआ कारोबार?
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि जिस प्रकार से पिछले दिनों में राखियों की मांग में वृद्धि हुई है. उसको देखते हुए इस वर्ष 12 हजार करोड़ रुपए के राखी त्यौहार पर व्यापार होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष यह व्यापार लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए का था.
• वर्ष 2022 में 7 हजार करोड़ रुपए
• वर्ष 2021 में 6 हजार करोड़ रुपए
• वर्ष 2020 में 5 हज़ार करोड़ रुपए
• वर्ष 2019 में 3500 करोड़ रुपए
• वर्ष 2018 में 3 हजार करोड़ रुपए
मेक इन इंडिया राखियों का क्रेज
इस साल अलग-अलग शहरों में अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स से राखी बनाए जाने का चलन दिखा. इसमें नागपुर से खादी राखी, जयपुर से सांगनेरी कला वाली राखी, पुणे से बीज वाली राखी, सतना से लकड़ी वाली राखी आदि शामिल है. आदिवासी इलाकों से बांस की राखी भी बाजार में देखने को मिली है. देशप्रेम को दर्शाते हुए बाजार में तिरंगा राखी भी खूब प्रचलन में है. वसुधैव कुटुम्बकम् और भारत माता जैसी थी पर बनी राखियां भी बाजार में देखने को मिल रही हैं. डिजाइनर राखी और चांदी से बनी राखी भी बाजार में बिकते दिख रही है.
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