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मैन्ग्रोव्स या मिलियन? क्या सुप्रीम कोर्ट अडानी को सौंपेगा सहारा सल्तनत की चाबियां?

अडानी ग्रुप ने सहारा की 88 संपत्तियों की खरीद पेशकश की है. इनमें वर्सोवा की 106 एकड़ ज़मीन सबसे विवादित है. SEBI अब तक बिक्री में नाकाम रहा और अब चुप है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

पालक शाह

अडानी समूह सहारा की बची हुई रियल एस्टेट संपत्तियां खरीदने की तैयारी में है. इसमें 88 से ज्यादा अहम प्रॉपर्टी शामिल हैं जैसे आम्बी वैली की 8,810 एकड़ ज़मीन, मुंबई का सहारा स्टार होटल, नोएडा की ऊंची इमारतें और लखनऊ की बेशकीमती जमीनें, यह सब एक गोपनीय, कई हजार करोड़ की डील के तहत अडानी प्रॉपर्टीज़ को सौंपा जा सकता है.

मुआवजा?

SEBI-सहारा रिफंड अकाउंट की "जीवनरेखा" वह ₹24,030 करोड़ की राशि है, जो सहारा समूह को लाखों निवेशकों को लौटानी है. सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में यह फैसला दिया था, लेकिन अब तक ये पैसे पूरी तरह लौटाए नहीं गए हैं.

अब जब 14 अक्टूबर को यह अहम दस्तावेज (टर्म शीट) सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के सामने पेश किया जाएगा और उनकी रिटायरमेंट की तारीख (23 नवंबर) सिर्फ छह हफ्ते दूर है, तब एक अहम सवाल सबके मन में रहेगा:  क्या वे अपने पूर्ववर्ती मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के पर्यावरणीय रुख को कायम रखेंगे या अडानी को सहारा की सल्तनत की चाबियां सौंप देंगे, इस ऐतिहासिक मामले को अपने अंतिम फैसले से नया मोड़ देंगे?

सहारा की कहानी सुब्रत रॉय की जेल यात्राओं, निवेशकों की मायूसी, और SEBI की नाकाम कोशिशों की 13 साल लंबी मेलोड्रामा  2023 में रॉय की मृत्यु के बाद दीवार से टकरा गई. ₹16,000 करोड़ किसी तरह रिफंड अकाउंट में आए, लेकिन बाकी सब अस्त-व्यस्त रहा: मुकदमेबाजी ने खरीदारों को दूर रखा, ईडी और एसएफआईओ की जांचों ने साया डाला, और भू-माफियाओं ने पुलिस शिकायतों को मजबूर किया. SEBI के एजेंट,  ब्रोकर, सलाहकार एक भी जमीन नहीं बेच सके.

सहारा ने कोर्ट में कहा कि "टुकड़ों-टुकड़ों में बेचने में सालों लग जाएंगे, इसलिए उन्होंने सब कुछ अडानी कंपनी पर भरोसा कर दिया.

6 सितंबर को एक अहम दस्तावेज (टर्म शीट) पर साइन किया गया, जिसकी कीमत एक सीलबंद लिफाफे में सिर्फ कोर्ट के लिए सुरक्षित रखी गई. उनका तर्क था: एक ही खरीदार, एक ही बड़ा सौदा, जिससे जल्दी मामला सुलझ जाए और निवेशकों को पैसे मिल सकें.

पूर्व CJI संजीव खन्ना का रुख

लेकिन यही समस्या है: वर्सोवा में सहारा के पास 106 एकड़ की कीमती जमीन है, जिसे पहले ₹8,000 करोड़ में बेचने की योजना थी. यह कोई आम जमीन नहीं है. फरवरी 2025 में, उस समय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस मामले पर रोक लगा दी, जब एमिकस क्यूरी शेखर नाफडे ने 1997 का एक कलेक्टर नोट पेश किया. इस नोट में बताया गया कि जमीन का एक हिस्सा मैन्ग्रोव जंगल है, जो मुंबई को बाढ़ और अनियंत्रित शहरी विकास से बचाने के लिए बहुत जरूरी हरित क्षेत्र है.

खन्ना की पीठ - न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी के साथ एक पल नहीं झिझकी. उन्होंने पर्यावरण और आवास मंत्रालयों और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किए, 15 दिनों में वर्सोवा की स्थिति पर हलफनामे की मांग की. SEBI और सहारा को नाफडे की निगरानी में मुंबई के रियल एस्टेट विशेषज्ञों के साथ बैठक करने का आदेश दिया गया ताकि ऐसा सौदा हो जो पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट न करे.

ओबेरॉय रियल्टी की ₹1,000 करोड़ की जमा राशि ब्याज समेत वापस कर दी गई. इसका मतलब है कि तात्कालिक मुनाफा कमाने के लिए पर्यावरण कानूनों की अनदेखी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.

खन्ना का तर्क था स्पष्ट: निवेशकों को उनका पैसा जरूर मिले, लेकिन मैन्ग्रोव काटकर नहीं. यह वह निर्णायक क्षण था, जब कानून ने मुनाफे और पर्यावरण के बीच संतुलन साधा.

अब फैसला CJI गवई का

14 मई 2025 को, भारत के पहले बौद्ध और दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले गवई ने अब तक न्याय में संतुलन और स्थिरता दिखाई है. उन्होंने बिना अनुमति के बुलडोजर चलाने पर रोक लगाई. नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया. और अनुच्छेद 370 को बनाए रखा.

लेकिन 14 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई से पहले, वर्सोवा की विवादित जमीन अब अडानी की डील का हिस्सा बन गई है. सहारा अब एक साफ और स्थायी समाधान चाहता है. वे चाहते हैं कि अदालत अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करके “पूर्ण न्याय” का आदेश दे. SEBI, ईडी और टैक्स विभाग की रोक हटाए. सभी 88 संपत्तियों को भविष्य की जांचों से बचाए. और एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में पैनल बनाकर आपराधिक मामलों को खत्म करके कर्ज चुकाया जाए.

यह अडानी के लिए एक बड़ा मौका है. आम्बी वैली बिना कड़े जांच के. सहारा स्टार बिना टैक्स के जाल में फंसे.

SEBI, जो सालों से एक भी संपत्ति बेचने में असफल रहा है, अब चुप है. एक ऐसा वॉचडॉग जो तब भी नहीं भौंकता जब अडानी शिकार पर निकलता है.

CJI गवई क्या करेंगे?

सुनवाई के बाद रिटायरमेंट के 40 दिन बचे हैं, और अब वे इतिहास रच सकते हैं.

अगर वे खन्ना की पर्यावरणीय सोच का सम्मान करते हैं, तो वे वर्सोवा के मैन्ग्रोव की जांच का आदेश देंगे और उस सीलबंद कीमत को खोलेंगे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हरे कानूनों को निवेशकों के सोने के लिए रौंदा न जाए.

या, अगर वे इस डील के वादे सहारा के पापों का तेज अंत और निवेशकों को जल्द रिफंड से प्रभावित होते हैं, तो वे अडानी की इस ‘कू’ को मंजूरी दे सकते हैं, जिससे यह कॉर्पोरेट दिग्गज खन्ना की सावधानी को कुचलते हुए आगे बढ़ेगा.

फैसला स्पष्ट है:

अडानी को हरी झंडी देना एक कॉर्पोरेट सम्राट का ताज पहनाना होगा, लेकिन जांच के लिए विराम लेना न्यायपालिका की आत्मा को बचा सकता है.

जब मैन्ग्रोव सरसराते हैं और निवेशक इंतज़ार में हैं, तो गवई का फैसला तय करेगा कि अडानी का सहारा अधिग्रहण न्याय की जीत होगी या बस एक और साम्राज्य का भोज.

14 अक्टूबर जल्दी नहीं आ सकती.


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