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मेनबोर्ड IPO से फंड जुटाने में 30% की बढ़ोतरी, सितंबर में ही आए 94% फंड; 71 कंपनियों ने शेयर बाजार में रखा कदम
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 84,400 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 64,900 करोड़ रुपये के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत के प्राथमिक बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाने में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 84,400 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 64,900 करोड़ रुपये के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है. इस दौरान सितंबर महीने में ही कुल फंड का करीब 94 फीसदी हिस्सा जुटाया गया. ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
सितंबर में 32 कंपनियों ने लॉन्च किए आईपीओ
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट 'इंडिया आईपीओ मार्केट: एच1 एफवाई27 एंड क्यू2 एफवाई27 रिव्यू' के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कुल 71 कंपनियों ने शेयर बाजार में कदम रखा. पिछले साल की समान अवधि में यह संख्या 55 थी.
जुलाई से सितंबर के बीच आईपीओ बाजार में गतिविधियां काफी तेज रहीं. सितंबर सबसे व्यस्त महीना रहा, जब 32 कंपनियों ने अपने आईपीओ लॉन्च किए और इनके जरिए कुल 40,400 करोड़ रुपये जुटाए. इससे पता चलता है कि पहली छमाही के दौरान आईपीओ से जुटाई गई अधिकांश पूंजी सितंबर में आई.
निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी, लिस्टिंग पर औसतन 18% का रिटर्न
आईपीओ बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में आईपीओ की लिस्टिंग के दिन औसतन 18 फीसदी का रिटर्न मिला, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 10 फीसदी था.
वहीं, खुदरा निवेशकों की ओर से औसत ओवरसब्सक्रिप्शन भी बढ़कर 28 गुना हो गया, जो एक साल पहले 25 गुना था. इससे नए आईपीओ में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ने का संकेत मिलता है.
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
सेक्टर के लिहाज से देखें तो आईपीओ के जरिए जुटाई गई कुल पूंजी में फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही. इस सेक्टर ने कुल फंड जुटाने में 43 फीसदी योगदान दिया. वहीं, आईपीओ की संख्या के मामले में कैपिटल गुड्स सेक्टर सबसे आगे रहा. इस क्षेत्र की 15 कंपनियों ने पहली छमाही के दौरान आईपीओ लॉन्च किए.
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को दिया सहारा
जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शेयर बाजार में 1.69 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया. इसके मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का शुद्ध निवेश 13,900 करोड़ रुपये रहा.
रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार की मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में शेयर जारी करने में मदद की. इस दौरान सितंबर में निफ्टी 50 में 5.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
IPO बाजार में आगे भी बनी हुई है बड़ी तैयारी
ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर और कैपिटल मार्केट्स एडवाइजरी लीडर करण मारवाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत का आईपीओ बाजार सतर्कता से तेजी की ओर बढ़ा, जिससे पहली छमाही में रिकॉर्ड फंड जुटाने में मदद मिली.
उन्होंने कहा कि आईपीओ के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाया जाना दिखाता है कि बाजार नई कंपनियों के शेयर जारी करने की क्षमता रखता है. हालांकि, निवेशकों की मांग अब चुनिंदा कंपनियों तक सीमित होती जा रही है और वे कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन, आईपीओ की कीमत, कॉरपोरेट गवर्नेंस और जुटाई गई पूंजी के इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ बाजार में आगे भी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 100 मेनबोर्ड कंपनियों और 159 छोटे एवं मझोले उद्यमों (SME) ने आईपीओ लाने के लिए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट दाखिल किए हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल करने का मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां आईपीओ लेकर आएंगी. नियामकीय मंजूरी मिलने में लगने वाला समय, आवश्यक मंजूरियों में देरी और कंपनियों की तैयारी जैसे कारक इन आईपीओ के बाजार में आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
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