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माधबी पुरी बुच की टूटी हुई व्यवस्था और जेन स्ट्रीट कांड

जेन स्ट्रीट की विफलता सेबी के इतिहास में सबसे विनाशकारी निगरानी चूक के रूप में दर्ज की जाएगी, जो बुच के तकनीकी प्रगति के दावों को कमजोर करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

पलक शाह

भारतीय डेरिवेटिव्स बाजार, जो वित्तीय गतिविधियों का एक उन्मादी केंद्र है, अब एक वैश्विक महाशक्ति बन चुका है, जिसकी दैनिक टर्नओवर $3 ट्रिलियन तक पहुँच गई है. फिर भी, पूर्व सेबी चीफ माधबी पुरी बुच के नेतृत्व में, इस विस्फोटक वृद्धि ने एक नियामक शून्य को छिपा दिया. मार्च 2022 से प्रारंभिक 2025 तक का उनका कार्यकाल अटकलों की अधिकता पर अंकुश लगाने और खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के भव्य वादों से परिभाषित था. हालांकि, जेन स्ट्रीट कांड एक चौंकाने वाला सूचकांक हेरफेर का मामला उनके शासन की विफलताओं को उजागर करता है, जिससे उनके भाषणों और वास्तविकता के बीच की खाई सामने आ जाती है.

नए सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे द्वारा अपने पहले छह महीनों में जेन स्ट्रीट पर किया गया साहसिक प्रहार बुच की निष्क्रियता के पूर्ण विरोधाभास में है. यह घोटाला न केवल उनकी विरासत पर दाग लगाता है, बल्कि सेबी की विशाल निगरानी विफलता की गहराई से जांच की मांग करता है, जो नियामक के इतिहास में अब तक की सबसे गंभीर चूक मानी जाएगी.

बुच ने एक सुधारक की ऊर्जा के साथ सेबी में प्रवेश किया, डेरिवेटिव्स बाजार की अस्थिरता को नियंत्रित करने और खुदरा निवेशकों को इसके खतरों से बचाने का वादा किया. उन्होंने एआई आधारित निगरानी और उच्च तकनीक निगरानी प्रणालियों में हुई प्रगति को अपने दृष्टिकोण की आधारशिला बताया, और एक नए युग की बाजार अखंडता का वादा किया. फिर भी, जेन स्ट्रीट कांड, जो उनके कार्यकाल के दौरान ही हुआ, इन उन्नयन को मात्र दिखावा साबित करता है. सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, जो पांडे के नेतृत्व में पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण द्वारा पारित किया गया, अमेरिका आधारित क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट ग्रुप एलएलसी ने जनवरी 2023 से मई 2025 के बीच 21 एक्सपायरी दिनों पर भारतीय सूचकांकों में कथित रूप से हेरफेर की.

कंपनी की "सुबह उछाल, दोपहर गिरावट" रणनीति यानी दिन की शुरुआत में फ्यूचर्स और स्टॉक्स की बड़ी मात्रा में खरीदारी कर सूचकांकों को ऊपर ले जाना, फिर बाजार बंद होने से पहले आक्रामक रूप से बेचकर उन्हें गिरा देना से कथित तौर पर अरबों डॉलर (₹4,843 करोड़ या $580 मिलियन, जो सेबी द्वारा जोड़े गए अवैध मुनाफे के रूप में चिन्हित हैं) की अवैध कमाई हुई. इससे खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान हुआ, जिन्हें गलत तरीके से कीमत तय किए गए विकल्पों (ऑप्शंस) में निवेश के लिए लुभाया गया था.

चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले के स्पष्ट संकेत बुच के कार्यकाल के दौरान अनदेखे कर दिए गए. अप्रैल 2024 में ही न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित एक अमेरिकी जिला अदालत ने यह खुलासा किया था कि जेन स्ट्रीट ने भारत के बाजारों से अपनी शिकार रणनीतियों के जरिए सालाना $1 बिलियन की कमाई करने की बात स्वीकार की थी. उसी महीने "जागो सेबी: खुदरा निवेशक लहूलुहान हो रहे हैं" शीर्षक से प्रकाशित बिजनेसवर्ल्ड की एक रिपोर्ट ने खतरे की घंटी बजाई थी और बताया था कि कैसे जेन स्ट्रीट और मिलेनियम मैनेजमेंट ने बाजार की खामियों का फायदा उठाकर खुदरा निवेशकों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया. ऐसे समय में जब डेरिवेटिव्स बाजार में प्रतिदिन का कारोबार ₹440 ट्रिलियन तक पहुँच गया था और 90% से अधिक खुदरा निवेशकों को घाटा हो रहा था, अमेरिका में चल रहा यह कोर्ट केस भारत के लिए एक चेतावनी थी. फिर भी बुच की सेबी निष्क्रिय बनी रही, जिससे जेन स्ट्रीट की हेराफेरी चलती रही. यहाँ तक कि जब फरवरी 2025 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने चिंता जताई, तब भी उनके कार्यकाल में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनके निगरानी क्षमता पर गंभीर सवाल उठते हैं.

इस निष्क्रियता से यह सवाल उठता है कि सेबी ने बुच के नेतृत्व में भारत के वित्तीय इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक को कैसे चूक दिया. उनके अत्यधिक प्रचारित एआई और हाई-टेक निगरानी सिस्टम, जिन्हें क्रांतिकारी कहा गया था, पूरी तरह से विफल साबित हुए. जेन स्ट्रीट की जटिल हेराफेरी को पकड़ने के बजाय, इन प्रणालियों ने एक वैश्विक क्वांट फंड को भारत के बाजारों से अरबों रुपये निकालने दिया, जबकि खुदरा निवेशक नुकसान उठाते रहे. यह विफलता सेबी के इतिहास में सबसे बड़ी निगरानी चूक के रूप में दर्ज की जाएगी, और यह बुच के तकनीकी प्रगति के दावों को झूठा सिद्ध करती है. बिजनेसवर्ल्ड के एक कॉलम "सेबी का लाइसेंस राज" ने उनके नियमों की आलोचना की, जिसमें कहा गया कि उन्होंने छोटे निवेशकों पर अनुपालन का बोझ डालकर "अराजकता" पैदा कर दी, जबकि जेन स्ट्रीट जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को खुली छूट दी. "प्रिय सेबी प्रमुख, स्टॉक मार्केट को ठीक होने दीजिए" शीर्षक से प्रकाशित एक अन्य लेख ने उनके प्रतिक्रियात्मक रवैये की आलोचना की, जिसमें उन्होंने प्रणालीगत कमजोरियों को नजरअंदाज कर केवल नए नियम थोपे.

बुच की निवेशक सुरक्षा पर की गई बयानबाजी अब खोखली लगती है, क्योंकि स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की. हितों के टकराव के आरोपों ने उनके नेतृत्व में विश्वास को और कमजोर किया, यह संकेत देते हुए कि वे जनहित की बजाय बाहरी दबावों से प्रभावित थीं. स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद जेन स्ट्रीट की शोषणकारी रणनीतियों पर अंकुश लगाने में उनकी विफलता, एक ऐसी टूटी हुई व्यवस्था को उजागर करती है जो परिणाम की बजाय दिखावे पर केंद्रित थी. डेरिवेटिव्स बाजार, जो खुदरा निवेशकों के लिए एक खतरनाक क्षेत्र बन गया था, असीम अटकलों पर फलता-फूलता रहा, जबकि बुच की सेबी सुधार के वादों के साथ केवल सुर्खियाँ बटोरती रही.

तुहिन कांता पांडे: एक मजबूत शुरुआत
सेबी के नए चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे ने अपने पहले छह महीनों में ही स्पष्ट दृढ़ता का प्रदर्शन किया है. जेन स्ट्रीट के खिलाफ उनकी त्वरित कार्रवाई कंपनी पर प्रतिबंध लगाना, उसके खातों को फ्रीज़ करना और अवैध मुनाफे को जब्त करने का आदेश देना जवाबदेही की दिशा में एक स्वागतयोग्य बदलाव का संकेत देती है. हालांकि उनके कार्यकाल को पूरी तरह से आंकना अभी जल्दबाज़ी होगी, लेकिन एक वैश्विक दिग्गज के खिलाफ उनका यह साहसिक कदम बाज़ार की अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संकेत देता है, जिसे लेकर सतर्क प्रशंसा की जा रही है.

जेन स्ट्रीट घोटाले ने बुच की विरासत पर एक कठोर रोशनी डाली है, जहाँ साहसी वादों के पीछे गंभीर निष्क्रियता छिपी रही. जैसे ही पांडे कल अपना जन्मदिन मनाते हैं, वह एक ऐसा बाज़ार विरासत में पा रहे हैं जो उनके पूर्ववर्ती की विफलताओं से गहराई तक घायल है. एक विस्तृत जांच आवश्यक है यह समझने के लिए कि सेबी ने इतने स्पष्ट चेतावनी संकेतों और प्रचारित तकनीकी उन्नतियों के बावजूद इस घोटाले को पनपने कैसे दिया. बुच का कार्यकाल, जिसे कभी सुधारवादी बताया गया था, अब एक चेतावनी बन चुका है कि कैसे दिखावे के लिए काम करते हुए जेन स्ट्रीट जैसे घोटाले फलते-फूलते रहे. पांडे की शुरुआती दृढ़ता आशा ज़रूर देती है, लेकिन भारत के बाज़ारों को फिर से स्वस्थ करना अब भी एक कठिन चुनौती बना हुआ है.
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