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सोने की तरह चांदी में भी हॉलमार्किंग होगी जरूरी, जानिए क्या है सरकार की प्लानिंग?
देश में जल्द ही सोने की तरह चांदी पर भी हॉलमार्किंग जरूरी हो जाएगी. इसकी की जानकारी खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश में सोने (Gold) की तरह ही लोग चांदी (Silver) की भी जमकर खरीदारी करते हैं. चांदी के आभूषणों से लेकर बर्तन तक खरीदे जाते हैं. इसे देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. जून, 2021 में सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग की शुरुआत की गई थी, जिसे अब 361 जिलों में विस्तारित किया जा चुका है. इसका उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करना और सोने के उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है. मौजूदा हॉलमार्किंग सिस्टम में छह-अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड शामिल है, जो सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है. ऐसे में अब सरकार ने सोने की तरह ही चांदी में भी हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला लिया है. तो आइए जानते हैं सरकार की पूरी प्लानिंग क्या है?
उपभोक्ताओं और आभूषण डीलर से ली जाएगी प्रतिक्रिया
मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को कंज्यूमर्स की डिमांड को देखते हुए चांदी और चांदी के सामान के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य करने पर विचार करना चाहिए. जोशी ने 78वें बीआईएस स्थापना दिवस समारोह में कहा कि चांदी की हॉलमार्किंग के लिए उपभोक्ताओं की ओर से मांग आ रही है. बीआईएस इस पर विचार-विमर्श कर निर्णय ले सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रह्लाद जोशी ने बताया है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है और सरकार हितधारकों के साथ विचार-विमर्श तथा बीआईएस द्वारा व्यवहार्यता आकलन पूरा होने के बाद निर्णय लेगी. उन्होंने कहा कि मैंने बीआईएस से व्यवहार्यता पर काम करने और उपभोक्ताओं तथा आभूषण डीलर से प्रतिक्रिया लेने को कहा है. हम सभी हितधारकों से परामर्श करेंगे और प्रक्रिया शुरू करेंगे. चांदी की हॉलमार्किंग यानी सफेद धातु की शुद्धता को प्रमाणित करना वर्तमान में दुकानदार या ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है.
3 से 6 महीने में लागू होगा हॉलम ें
बीआईएस के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि ब्यूरो तीन से छह महीने में अनिवार्य चांदी हॉलमार्किंग लागू करने के लिए तैयार हो सकता है. हितधारकों के साथ विचार-विमर्श जारी है. उन्होंने कहा कि हितधारकों के साथ कई दौर की चर्चा हुई है और वे इसके पक्ष में हैं. छह अंक वाले अल्फान्यूमेरिक कोड पर चर्चा जारी है. यह कदम जून, 2021 में शुरू की गई सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग के सफल कार्यान्वयन के बाद उठाया गया है, जो अब 361 जिलों में विस्तारित हो चुकी है. इसका उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करना और सोने के उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है. मौजूदा हॉलमार्किंग प्रणाली में छह-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड शामिल है, जो सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है.
इन राज्यों से आ रही है डिमांड
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि अब खरीदे जा रहे करीब 90 प्रतिशत आभूषणों की हॉलमार्किंग की जाती है. इसकी शुरुआत के बाद से 44.28 करोड़ से अधिक स्वर्ण आभूषणों को विशिष्ट पहचान के साथ हॉलमार्क द्वारा चिन्हित किया गया है. उन्होंने बताया कि गुजरात, कर्नाटक और अन्य राज्यों के हितधारकों ने चांदी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का अनुरोध किया है. बीआईएस अधिनियम के तहत 1986 में स्थापित भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) एक स्वायत्त राष्ट्रीय निकाय है. इस पर उत्पादों और सेवाओं के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करने की जिम्मेदारी है.
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