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6 साल पुराने मामले में LIC को देने होंगे 1.5 करोड़ से ज्‍यादा, ये है पूरा मामला 

उपभोक्‍ता अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इंश्‍योरेंस कंपनी ये साबित करने में विफल रही कि इंश्‍योरेंस धारक ने किसी तरह से नियमों का उल्‍लंघन किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता अदालत ने  2018 में एक महिला की कैंसर ये हुई मौत के मामले में भुगतान ना किए जाने को लेकर एलआईसी के खिलाफ आदेश जारी किया है. राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता अदालत ने एलआईसी को 1.57 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है. 2017 में इस महिला की मौत ब्रेस्‍ट कैंसर के कारण हुई थी जिसके बाद 2018 में एलआईसी ने भुगतान देने से मना कर दिया था. कोर्ट ने इस मामले में एलआईसी को लेकर सख्‍त टिप्‍पणी भी की. 

आखिर क्‍या है ये पूरा मामला? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला के द्वारा 7 लाख रुपये का प्रीमियम अदा करने के बाद 1 करोड़ रुपये की पॉलिसी ली गई थी. इस पॉलिसी को लेने से पहले महिला के द्वारा मेडिकल जांच भी कराई गई थी, जिसके बाद पॉलिसी को 29 मार्च 2016 को एलआईसी ने अप्रूव कर दिया था. एलआईसी ने उपभोक्‍ता अदालत में बताया कि उसने 30 मार्च 2016 को इसकी रिसिप्‍ट भी जारी कर दी थी. लेकिन 29 मार्च को जांच कराने के बाद ही महिला अस्‍पताल में भर्ती हो गई. 

डॉक्‍टरों ने दिए दिल का ऑपरेशन करने के संकेत 
महिला 29 तारीख को अस्‍पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्‍टरों की ओर से कहा गया कि मरीज की बॉयोप्‍सी करनी पड़ेगी. इसके बाद 31 मार्च को महिला की सभी तरह की जांचें शुरू हो गई. 6 अप्रैल को महिला को इलाज के बाद अस्‍पताल से डिस्‍चार्ज कर दिया गया. उसके बाद 30 मार्च 2017 को उस पॉलिसी को रिन्‍यू कर दिया गया. लेकिन उसके बाद 28 अप्रैल 2017 को महिला की ब्रेस्‍ट कैंसर के कारण मौत हो गई. 

क्‍लेम देने से मुकर गई एलआईसी 
महिला की मौत के बाद जब उनके पति ने क्‍लेम फाइल किया तो एलआईसी ये कहकर मुकर गई कि पीड़ित ने इस बीमारी की जानकारी उसे नहीं दी. एलआईसी ने ये भी कहा महिला का मेडिकल हुआ था उस उन्‍हें ये जानकारी देनी चाहिए थी लेकिन उन्‍होंने नहीं दी, जबकि महिला का एनआरआई अस्‍पताल में इलाज चल रहा था. एलआईसी ने ये भी कहा कि अगर इस बीमारी की जानकारी उसे दी गई होती तो वो अपने कार्पोरेट ऑफिस से संपर्क करके अप्रूवल जरूर लेती. 

आखिर NCDRC ने इस मामले में क्‍या कहा? 
इस मामले में पीड़ित ने कहा कि कैंसर की बीमारी उसकी जानकारी में बाद में सामने आई. इस मामले की सुनवाई करते हुए NCDRC ने कहा कि इंश्‍योरेंस कंपनी इस बात को लेकर संबंध स्‍थापित करने में पूरी तरह से फेल साबित हुई कि पीड़ित ने किसी भी तरह का नियम तोड़ा है. पीड़ित को 30 मार्च 2016 के ना तो पहले पता थी और ना ही बाद में इसकी जानकारी थी कि वो इस बीमारी से जूझ रही है. इस मामले में एलआईसी ने कहा कि अगर ऐसी सूचना व्‍यक्ति की जानकारी में आती है और वो इसका खुलासा नहीं करता है तो ऐसे मामले खारिज की श्रेणी में आ जाते हैं.

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद उपभोक्‍ता अदालत ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि इंश्‍योरेंस कंपनी को 1 करोड़ रुपये का पेमेंट 9 प्रतिशत ब्‍याज के साथ करना होगा. जबकि इंश्‍योरेंस कंपनी को इस केस के कारण पैदा हुए मानसित तनाव और हैरासमेंट के लिए 2 लाख रुपये का भुगतान 9 प्रतिशत ब्‍याज के साथ करना होगा.जबकि 50 हजार रुपये लिटिगेशन की राशि देनी होगी. कुल इंश्‍योरेंस कंपनी को 1.57 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. 

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