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कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए मुद्रास्फीति में बड़ी गिरावट, खाद्य कीमतों में कमी बनी मुख्य वजह
ग्रामीण भारत में घटती मुद्रास्फीति दर यह दर्शाती है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण से ग्रामीण जीवन-यापन की लागत में कुछ राहत मिली है. हालांकि गैर-खाद्य श्रेणियों में मामूली वृद्धि भविष्य के लिए सतर्क संकेत देती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
सितंबर 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. श्रम ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी के कारण हुई है. इससे जहां श्रमिकों के जीवनयापन की लागत में थोड़ी राहत मिली है, वहीं देशभर में कीमतों के दबाव में कमी का संकेत भी मिला है. संशोधित गणना पद्धति और अद्यतन उपभोग पैटर्न के चलते आंकड़े अब अधिक सटीकता से ग्रामीण आर्थिक स्थिति को दर्शा रहे हैं.
कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए नकारात्मक वृद्धि
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, कृषि श्रमिकों (AL) के लिए वर्ष-दर-वर्ष उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति -0.07 प्रतिशत रही, जबकि ग्रामीण श्रमिकों (RL) के लिए यह घटकर 0.31 प्रतिशत पर आ गई. अगस्त में ये दरें क्रमशः 1.07 प्रतिशत और 1.26 प्रतिशत थीं. खाद्य सूचकांक में भी कृषि श्रमिकों के लिए -2.35 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.81 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई.
सीपीआई सूचकांक में मामूली कमी
सितंबर में अखिल भारतीय सीपीआई सूचकांक कृषि श्रमिकों के लिए 0.11 अंक घटकर 136.23 पर पहुंच गया, जबकि ग्रामीण श्रमिकों का सूचकांक 0.18 अंक घटकर 136.42 पर रहा. ये आंकड़े 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 नमूना गांवों से जुटाए गए हैं. आधार वर्ष 2019 को 100 मानकर सूचकांक तैयार किया गया है.
गैर-खाद्य श्रेणियों में मामूली बढ़त
श्रम ब्यूरो के अनुसार, जहां खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज गिरावट आई है, वहीं “ईंधन एवं प्रकाश,” “कपड़ा एवं जूते,” तथा “विविध” श्रेणियों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे संकेत मिलता है कि गैर-खाद्य वस्तुओं में कुछ हद तक मूल्य दबाव बना हुआ है.
राज्यवार स्थिति
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों दोनों के लिए सूचकांक उच्च स्तर पर रहा. वहीं गोवा, त्रिपुरा और सिक्किम में सबसे कम स्तर दर्ज किया गया. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार में सूचकांक में हल्की गिरावट देखी गई, जो राष्ट्रीय प्रवृत्ति के अनुरूप है.
देशव्यापी कीमतों में नरमी का रुझान
ग्रामीण मुद्रास्फीति में यह गिरावट देशभर में कीमतों के दबाव में कमी के साथ मेल खाती है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 1.54 प्रतिशत पर आ गई, जो जून 2017 के बाद सबसे निचला स्तर है. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त के 0.52 प्रतिशत से घटकर 0.13 प्रतिशत हो गई.
सूचकांकों की गणना पद्धति में सुधार
श्रम ब्यूरो ने कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के सीपीआई सूचकांकों की गणना पद्धति में संशोधन किया है. अब इसमें Geometric Mean का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कम हुआ है. इसके अलावा *COICOP-2018* के अनुरूप उपभोग पैटर्न को भी अपडेट किया गया है, जिससे डेटा अधिक सटीक और प्रतिनिधिक बन गया है.
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