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जानिए आखिर भारत में क्‍यों निवेश करना चाह रही हैं ब्रिटेन की 22 से ज्‍यादा रक्षा कंपनियां? 

इनमें से कुछ तो पहले से ही भारत में काम कर रही हैं. जबकि कुछ भविष्‍य में अपने उद्यम वहां लगाने की तैयारी कर रही हैं. लेकिन इसे और बढ़ाने के लिए निवेश सुरक्षा पर ध्‍यान देने की जरूरत है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

कुछ दिन पहले खालिस्‍तानी प्रदर्शनकारियों के द्वारा भारतीय दूतावास पर प्रदर्शन के दौरान वहां तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी. इस घटना के बाद भारत ने कड़ा एतराज जताया और भारत में ब्रिटिश दूतावास के बाहर से अतिरिक्‍त सुरक्षा को हटा लिया था. इससे दोनों देशों के बीच तनाव में इजाफा हो गया था. लेकिन अब ऐसी खबर आ रही है कि भारत में ब्रिटेन के रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई 22 से ज्‍यादा कंपनियां यहां अपना कारोबार बढ़ाना चाह रही हैं. इन सभी कंपनियों का कुल रेवेन्‍यू 60 बिलियन डॉलर है. 

आखिर ये खबर आई कहां से 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड मैक्कलम ने एजेंसी को बताया कि करीब 60 अरब डॉलर के रेवेन्‍यू वाली 22 ब्रिटिश रक्षा कंपनियों का एक समूह भारत में व्यापार करने पर फोकस कर रहा है. उनमें से लगभग 11 कंपनियां ऐसी हैं जो पहले से ही भारत में सहायक कंपनियों के संयुक्त उद्यम के तौर पर काम कर रही हैं और अपने प्‍लांट स्थापित कर चुकी हैं, लेकिन अब वे इसे और अधिक बढ़ाना चाहती हैं. 
मीडिया रिपोर्ट ये भी कहती है कि भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में अपनी प्रजेंस रखने वाली कंपनियों में BAE Systems एक भारतीय इकाई है, जबकि MBDA का Larsen & Toubro, और Rolls-Royce का जेट इंजन टेक्‍नोलॉजी पर सहयोग करना चाहता है. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि कौन सी कंपनियां निवेश करना चाह रही हैं और किन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही हैं.

आखिर क्‍यों भारत में आना चाहती हैं ब्रिटिश कंपनियां 
इस खबर में दूसरा सबसे अहम पहलू ये है कि आखिर ब्रिटेन की 22 से ज्‍यादा कंपनियां भारत में क्‍यों आना चाह रही हैं. पिछले कुछ समय में ऐसी कौन सी परिस्थितियां पैदा हुई हैं जिसके कारण ये डेवलपमेंट हुआ है. जानकारों का कहना है कि इसका एक कारण चीन का लगातार दुनिया के कई देशों के बढ़ता तनाव और उसका कई देशों के लिए चुनौती बनना है. इसका दूसरा कारण ये है कि ये तब होता है जब आपके इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ अच्‍छे संबंध होते हैं. वहीं ब्रिटिश रक्षा कंपनियां अपनी सप्‍लाई श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर विचार कर रहे हैं. ब्रिटेन भारत के साथ आर्थिक, रक्षा और सुरक्षा संबंधों को गहरा करना चाहता है. यह मुक्त व्यापार समझौते के बीच आता है जिस पर भारत और ब्रिटेन के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बातचीत की जा रही है.

स्‍थायी ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ सकता है निवेश 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि स्थायी ऊर्जा और हरित वित्त सहयोग ऐसे क्षेत्रों में एक है जहां ये कपंनिया अपना सहयोग बढ़ाना चाहती हैं. इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों का ये भी कहना है कि अगर सरकार इसे भविष्‍य में और बढ़ाना चाहती है तो निवेश की सुरक्षा पर अधिक स्पष्टता बरते जाने की उम्‍मीद है.
 


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