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जे.आर.डी. टाटा ने रतन टाटा को चेयरमैन बनाने से पहले ज्योतिषी से ली थी सलाह : आर. गोपालकृष्णन

यह खुलासा भारतीय व्यवसायिक संस्कृति के उस पक्ष को उजागर करता है जहां आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ डेटा और निर्णय के साथ-साथ ‘सही समय’ की गणना भी मायने रखती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

भारत के सबसे प्रतिष्ठित उद्योग समूह टाटा (Tata Group) में नेतृत्व परिवर्तन की एक दिलचस्प कहानी सामने आई है. टाटा संस के पूर्व निदेशक आर. गोपालकृष्णन ने खुलासा किया है कि जे.आर.डी. टाटा ने रतन टाटा को चेयरमैन नियुक्त करने से पहले अपने ज्योतिषी से सलाह ली थी. यह खुलासा न केवल टाटा समूह के इतिहास का एक अनसुना अध्याय उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय व्यवसायिक जगत में परंपरा, आस्था और आधुनिकता किस तरह एक साथ चलते हैं.

टाटा संस के पूर्व निदेशक और वर्तमान में कैस्ट्रॉल इंडिया के चेयरमैन आर. गोपालकृष्णन ने हाल ही में लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा की. अपनी पोस्ट में जे.आर.डी. टाटा के शब्दों को उद्धृत करते हुए लिखा, “जे.आर.डी. टाटा ने रतन टाटा से कहा था ‘अभी किसी को मत बताना, मैं अपने ज्योतिषी से सलाह लेना चाहता हूं कि बोर्ड को सूचित करने का सही दिन कौन सा होगा.’” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह पोस्ट व्यवसाय में ज्योतिष को बढ़ावा देने के लिए नहीं थी, बल्कि यह दिखाने के लिए थी कि भारतीय संस्कृति में ज्योतिष कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है.

ज्योतिष को बढ़ावा नहीं, केवल स्वीकारोक्ति

गोपालकृष्णन ने लिखा, “मैं व्यवसायिक निर्णयों में ज्योतिष को बढ़ावा नहीं दे रहा, लेकिन यह स्वीकार करता हूं कि यह हमारे सांस्कृतिक ताने-बाने का हिस्सा है. हम सब ऐसे नेताओं को जानते हैं जो किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत या घोषणा से पहले ज्योतिषी से परामर्श करते हैं.” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी अपने जीवन के बाद के वर्षों में ज्योतिष को गंभीरता से लेना शुरू किया था, जब कुछ भविष्यवाणियाँ, उनकी हत्या से जुड़ी भविष्यवाणी सहित सही साबित हुई थीं.

टाटा समूह की सफलता और सही समय का महत्व

गोपालकृष्णन के इस खुलासे ने फिर से यह चर्चा छेड़ दी है कि भारतीय कॉरपोरेट जगत में दूरदृष्टि, समय और आस्था का मेल कैसे काम करता है. भारत में ज्योतिष को अंधविश्वास नहीं बल्कि निर्णय लेने के समय को ऊर्जा और परिस्थितियों के साथ संतुलित करने का एक साधन माना गया है.

रतन टाटा ने 1991 में टाटा समूह की कमान संभाली थी. उस समय समूह की कुल आय लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो ज्यादातर भारत से आती थी. 2012 में उनके सेवानिवृत्त होने तक यह बढ़कर 100 अरब डॉलर से अधिक हो गई, जिसमें दो-तिहाई आय अंतरराष्ट्रीय कारोबार से आती थी. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने जगुआर लैंड रोवर, टेटली और कोरस स्टील जैसी वैश्विक कंपनियों का अधिग्रहण किया और भारत की औद्योगिक छवि को विश्व पटल पर स्थापित किया.

अन्य उद्योगपतियों का भी ज्योतिष पर विश्वास

ज्योतिष से परामर्श लेने की परंपरा केवल टाटा समूह तक सीमित नहीं रही. धीरूभाई अंबानी और बाद में मुकेश अंबानी भी बड़े निर्णयों से पहले ज्योतिषियों से परामर्श लेने के लिए जाने जाते हैं. बिरला परिवार भी पारंपरिक रूप से शुभ मुहूर्त और रणनीतिक लॉन्च के लिए ज्योतिषियों की सलाह लेते रहे हैं.

 


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