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क्या कॉरपोरेट सेक्टर के लिए अहम मेंटल हेल्थ, UN के चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
UN के अनुसार दुनिया में आज कोई एक बिलियन से ज्यादा लोग मेंटल हेल्थ की समस्या से जूझ रहे हैं. कामकाजी क्षेत्रों में मेंटल हेल्थ की समस्या के कारण के कंपनियों की प्रोडक्टिविटी प्रभावित हो रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मेंटल हेल्थ से जुड़ा मामला सभी के लिए महत्वपूर्ण है. जब भी कहीं इस पर बात होती है तो हर कोई इस पर बड़ी गंभीरता से बात करता है. लेकिन सवाल ये है कि क्या मेंटल हेल्थ के विषय को हमारे वर्कप्लेस में आज भी गंभीरता से लिया जा रहा है. क्या इसकी अवेयरनेस को लेकर किसी तरह का कोई प्रयास हो रहा है.
बड़ी संख्या में लोग जूझ रहे हैं इस समस्या से
यूनाइटेड नेशन के अनुसार पूरी दुनिया में आज कोई एक बिलियन से ज्यादा लोग मेंटल हेल्थ की समस्या से जूझ रहे हैं. कामकाजी क्षेत्रों में मेंटल हेल्थ की समस्या के कारण के आज कंपनियों की प्रोक्डिटिविटी भी प्रभावित हो रही है. यही नहीं इसके कारण आज लोग वर्कप्लेस से अबसेंट भी हो रहे हैं. इसलिए अब समय आ गया है कि जब कॉरपोरेट जगत को अपने कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है.
एसटीएलओ की सीएचआरओ अंजली बाइस कहती है कि महामारी ने कर्मचारियों के दिमाग पर बुरा असर डाला है. ऐसे में हमें उनके ओवरऑल हेल्थ के साथ- साथ मेंटल हेल्थ को लेकर भी ध्यान देने की जरूरत है.
आखिर कंपनी कैसे पहचाने समस्या को
जानकार बताते हैं कि इसे किसी भी कमर्चारी की बातों में पॉजिटीव और नेगेटिव बातों के जरिए जाना जा सकता है. कमर्चारी अपनी कंपनी को अपनी खराब मानसिक स्थिति को बताने में घबराता है. क्यों कि उसे लगता है कि ये बताने के बाद उसकी कंपनी से उसे निकाला जा सकता है या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जा सकती है.
इंगेज्ड स्ट्रेटजी के फाउंडर और एमडी क्रिस्टीफर क्रिस रावर्ट कहते हैं कि इसे वर्कप्लेस में कर्मचारी के अलग-अलग तरह के व्यवहार से भी जाना जा सकता है। विशेष तौर उसके नकारात्मक भावानाओं जैसे परेशानी, डर,तनाव और उलझन इनसे जाना जा सकता है. वो कहते हैं कि संस्थानों के पास अपने कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ से लेकर दूसरी समस्याओं के लिए योजना होनी चाहिए, जिससे इसके चलते संस्थान में कोई हादसा न हो और उसके चलते कोई तनाव ना फैले.
अलग-अलग कार्यक्रम से मिल सकती है राहत
कर्मचारियों की इस समस्या को कई तरह से दूर किया जा सकता है. कंपनी इसके लिए अपने इंप्लॉई के ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफर कर सकती हैं. जिसमें उन्हें सेल्फ लीडरशिप और सेंस ऑफ हैप्पीनेस जैसे कार्यक्रम शामिल हैं. इसके अतिरिक्त इंप्लॉई असिस्टेंट प्रोग्राम जैसे कार्यक्रम चलाकर उन्हें इससे दूर किया जा सकता है. बास कहते हैं कि टीम्स का मेंटल हेल्थ चेकअप, उनकी बातचीत के लिए एक ओपन स्पेस बनाने के अतिरिक्त सेल्फ हेल्प टूल बनाकर भी इस समस्या को दूर किया जा सकता है.
योगा भी दे सकता है बड़ी राहत
इस समस्या से खुद इंप्लॉय भी यागा जैसी एक्टिविटी करके काफी हद तक नियंत्रण पा सकते हैं. रोज ना सही लेकिन इसे वैकल्पिक दिनों में करके भी इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है. योग के अंतर्गत किए जाने वाले आसन आपको फिजिकली स्वस्थ रख सकते हैं और आलस्य को दूर रख सकते हैं. प्राणायाम आपके मन और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है.
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