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₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट स्कीम में बढ़ी दिलचस्पी, JSW ग्रुप और NLC इंडिया समेत 25 कंपनियां दौड़ में
भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में घरेलू और वैश्विक कंपनियों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली. इस दौरान योजना की रूपरेखा, बोली प्रक्रिया और प्रमुख शर्तों पर विस्तार से जानकारी दी गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को लेकर इंडस्ट्री में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. JSW Group और NLC India सहित कम से कम 25 कंपनियों ने ₹7,280 करोड़ की इस इंसेंटिव योजना में हिस्सा लेने की तैयारी दिखाई है. इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और डिफेंस सेक्टर के लिए अहम इस पहल से भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है.
प्री-बिड मीटिंग में दिखा जोरदार रिस्पॉन्स
भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में घरेलू और वैश्विक कंपनियों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली. इस दौरान योजना की रूपरेखा, बोली प्रक्रिया और प्रमुख शर्तों पर विस्तार से जानकारी दी गई.
मंत्रालय ने पहले ही ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे. इस स्कीम के तहत अधिकतम पांच कंपनियों का चयन किया जाएगा, जिनमें से हर एक को 1,200 MTPA तक की उत्पादन क्षमता विकसित करनी होगी. इस तरह कुल मिलाकर 6,000 MTPA की क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
कब तक जमा होंगी बोलियां
इस योजना के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 28 मई 2026 तय की गई है, जबकि तकनीकी बोलियां 29 मई को खोली जाएंगी. इसके अलावा, कंपनियां 22 अप्रैल 2026 तक ईमेल के जरिए अपने सवाल और सुझाव मंत्रालय को भेज सकती हैं. प्री-बिड बैठक में उठाए गए सवालों का मौके पर ही समाधान भी किया गया, जिससे प्रक्रिया को और स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई.
पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया
मंत्रालय के अनुसार, पूरी बोली प्रक्रिया CPP पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आयोजित की जाएगी. इसमें ‘न्यूनतम लागत प्रणाली’ (LCS) के तहत दो-चरणीय पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसका मकसद योग्य कंपनियों का निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करना है.
क्यों अहम है यह स्कीम
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPMs) दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट्स में गिने जाते हैं और इनका इस्तेमाल कई हाई-टेक सेक्टर्स में होता है. इनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस शामिल हैं.
इस स्कीम के जरिए भारत:
1. घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना चाहता है
2. आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है
3. और एक ग्लोबल प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है
इंडस्ट्री के लिए बड़ा मौका
मौजूदा समय में वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता और चीन पर निर्भरता को देखते हुए यह योजना भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम्स से भारत न सिर्फ आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर अपनी स्थिति भी मजबूत करेगा.
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