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Infosys की यूनिट पर अमेरिका में जुर्माना: साइबर हमले की जानकारी समय पर न देने का आरोप
साइबर सुरक्षा में लापरवाही के चलते इन्फोसिस की यूनिट पर जुर्माना दिखाता है कि डेटा सुरक्षा नियमों का पालन वैश्विक स्तर पर अनिवार्य है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस की एक अमेरिकी सहायक कंपनी पर वर्मोंट राज्य के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल रेगुलेशन (DFR) ने जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना इन्फोसिस BPM की यूनिट McCamish Systems (IMS) पर लगाया गया है. आरोप है कि IMS ने 2023 में हुए साइबर हमले की पूरी जानकारी समय पर अधिकारियों और प्रभावित लोगों को नहीं दी.
क्या है मामला?
साल 2023 में IMS पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिससे कंपनी के कुछ सिस्टम और एप्लिकेशन काम करना बंद कर दिए थे. यह यूनिट वित्तीय सेवाओं से जुड़ी है और जीवन बीमा, रिटायरमेंट योजनाएं और एन्युटी प्रोडक्ट्स जैसी सेवाएं देती है. आरोप है कि इस हमले के बाद कंपनी ने न तो समय पर जांच रिपोर्ट दी और न ही उन ग्राहकों को जल्द सूचित किया, जिनका डेटा खतरे में था.
बिना सुनवाई के समझौता, 1 करोड़ रुपये का जुर्माना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में IMS ने बिना किसी कानूनी सुनवाई के DFR के साथ एक सेटलमेंट एग्रीमेंट किया है. हालांकि, इस समझौते में IMS ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. कंपनी की एक शेयर बाजार फाइलिंग के अनुसार, IMS को आदेश जारी होने के 30 दिनों के भीतर \$125,000 (करीब 1 करोड़ रुपये) का जुर्माना भरना होगा.
पहले भी भर चुकी है बड़ी रकम
मार्च 2024 में IMS ने इसी साइबर हमले से जुड़े क्लास-एक्शन मुकदमों को निपटाने के लिए भी एक समझौता किया था. उस समय IMS ने \$17.5 मिलियन (लगभग 140 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था. यह समझौता उन दावों से संबंधित था, जो IMS और उसके कुछ ग्राहकों के खिलाफ दायर किए गए थे.
क्या होता है साइबर हमला?
साइबर हमला वह स्थिति होती है, जब कोई व्यक्ति या समूह इंटरनेट के जरिए किसी कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत रूप से घुसकर डेटा चुराता या सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. इस तरह के हमले से कंपनियों को भारी आर्थिक और भरोसे का नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल युग में बेहद जरूरी हो गई है.
इन्फोसिस पर इसका असर?
भले ही जुर्माना IMS पर लगाया गया हो, लेकिन यह मामला इन्फोसिस समूह की वैश्विक जिम्मेदारियों पर सवाल जरूर खड़ा करता है. अमेरिका जैसे सख्त रेगुलेशन वाले देश में इस तरह की घटनाएं ब्रांड छवि को प्रभावित कर सकती हैं.
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