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मार्च में बढ़ी महंगाई: 3.4% पर पहुंची रिटेल इंफ्लेशन, मिडिल ईस्ट तनाव का असर
खाद्य महंगाई भी मार्च में बढ़कर 3.87% हो गई, जो फरवरी में 3.47% थी. ग्रामीण इलाकों में यह 3.96% और शहरी क्षेत्रों में 3.71% रही. इससे साफ है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत में मार्च महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़े सामने आ गए हैं और इनमें हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 3.4% पर पहुंच गई, जो फरवरी में 3.21% थी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों ने कीमतों पर दबाव बनाया, जिसका सीधा असर महंगाई पर देखने को मिला.
ग्रामीण और शहरी महंगाई में अंतर
नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) फ्रेमवर्क के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.63% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.11% दर्ज की गई. इस संशोधित सीरीज में 2024 को आधार वर्ष माना गया है, जिससे मौजूदा उपभोग पैटर्न को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके.
अनुमान के करीब रहे आंकड़े
अर्थशास्त्रियों के अनुमान भी लगभग इसी स्तर पर थे. एक सर्वे में मार्च की महंगाई 3.48% रहने का अनुमान जताया गया था. ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को ऊपर धकेला, हालांकि सोने की कीमतों में गिरावट से कुछ हद तक संतुलन बना रहा.
RBI के लक्ष्य के भीतर बनी महंगाई
बढ़ोतरी के बावजूद महंगाई दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य (2%–6% के दायरे) के भीतर बनी हुई है. यह लगातार 12वां महीना है जब महंगाई इस दायरे से नीचे रही है.
मिडिल ईस्ट तनाव का सीधा असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के चलते तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. खासतौर पर ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की कार्रवाई और समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
इसका असर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर भी पड़ा है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति करता है. इन घटनाक्रमों से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर भी पड़ रहा है.
खाने-पीने की चीजों में भी बढ़ी महंगाई
खाद्य महंगाई भी मार्च में बढ़कर 3.87% हो गई, जो फरवरी में 3.47% थी. ग्रामीण इलाकों में यह 3.96% और शहरी क्षेत्रों में 3.71% रही. इससे साफ है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. हालांकि, कुछ राहत भी देखने को मिली. प्याज, आलू और लहसुन जैसी सब्जियों की कीमतों में गिरावट आई, जिससे कुल खाद्य महंगाई को काबू में रखने में मदद मिली. दालों की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई.
कुछ सेक्टर में तेज उछाल
दूसरी ओर, कुछ श्रेणियों में कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली. चांदी के गहनों की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया, जबकि सोने और हीरे के गहने भी महंगे हुए. सब्जियों में टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाला. इसके अलावा पर्सनल केयर और सेवाओं से जुड़े सेक्टर में भी महंगाई ज्यादा रही, जबकि ट्रांसपोर्ट और शिक्षा जैसे सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर बने रहे.
राज्यों में कहां रही सबसे ज्यादा महंगाई
राज्यवार आंकड़ों में तेलंगाना में सबसे ज्यादा 5.83% महंगाई दर्ज की गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का स्थान रहा. इससे संकेत मिलता है कि अलग-अलग राज्यों में महंगाई का असर अलग-अलग स्तर पर पड़ा है.
नई CPI बास्केट का असर
नई CPI सीरीज में कई बदलाव किए गए हैं. इसमें आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है. साथ ही उपभोग की टोकरी (बास्केट) को अपडेट किया गया है, जिससे यह आधुनिक खर्च की आदतों को बेहतर तरीके से दिखा सके.
नई व्यवस्था में खाने-पीने की वस्तुओं का वजन घटाया गया है, जबकि हाउसिंग, ईंधन और सेवाओं से जुड़े सेक्टर का महत्व बढ़ा है. इसके अलावा OTT सब्सक्रिप्शन और डिजिटल उत्पादों जैसी नई चीजों को भी शामिल किया गया है.
RBI ने दी बाहरी जोखिमों की चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति बैठक में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक तनाव बढ़ने पर बाहरी जोखिम भी तेज हो सकते हैं. ऐसे में महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बना रह सकता है.
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का औसत अनुमान 4.6% रखा है. तिमाही आधार पर देखें तो पहली तिमाही में 4.0%, दूसरी में 4.4%, तीसरी में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% रहने का अनुमान जताया गया है. इससे साफ है कि आने वाले महीनों में महंगाई में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
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