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भारत का व्यापार घाटा अक्टूबर में बढ़कर $41.68 अरब पहुंचा

भारत का व्यापार घाटा अक्टूबर में $41.68 अरब तक बढ़ जाना अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। सोने के आयात में भारी वृद्धि और निर्यात गिरावट ने चालू खाते पर दबाव बढ़ा दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

भारत की व्यापार घाटे की तस्वीर फिर गंभीर होती दिख रही है. अक्टूबर 2025 में देश का व्यापार घाटा 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले महीने के 32.15 अरब डॉलर से कहीं अधिक है. इस बढ़त के पीछे सोने के आयात में तेज उछाल और निर्यात में गिरावट जैसी चुनौतियां हैं और यह संकेत देता है कि भारत की विदेशी व्यापार नीति और आर्थिक तैयारी के लिए बड़ा परीक्षण सामने है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $41.68 अरब हो गया है, जबकि सितंबर में यह $32.15 अरब था. रॉयटर्स के सर्वे में आर्थिक विशेषज्ञों ने अक्टूबर में घाटा $28.8 अरब रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे बहुत ऊपर आए हैं.

निर्यात में बड़ी गिरावट

अक्टूबर में भारत का कुल निर्यात 11.8% गिरकर $34.38 अरब रह गया. यह निर्यात‑गिरावट आर्थिक चिंताओं को बढ़ा रही है क्योंकि देश की बाहर भेजी जाने वाली सामग्री पर दबाव पड़ रहा है.

आयात में तेजी, सोना सबसे बड़ा योगदानकर्ता

उसी महीने आयात में 16.63% की बढ़त हुई और यह $76.06 अरब पर पहुंच गया. विशेष रूप से, सोने का आयात $14.72 अरब तक पहुंच गया, जो पिछले साल अक्टूबर में $4.92 अरब था.

भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ दबाव

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों की पृष्ठभूमि में यह घाटा और गंभीर हो जाता है. अक्टूबर में भारत का अमेरिका को निर्यात घटकर $6.3 अरब रह गया, जो पिछले साल के $6.9 अरब के मुकाबले कम है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ (लगभग 50%) ने भारत के एक्सपोर्ट‑उद्योगों, जैसे कपड़ा और जूते, को कम प्रतिस्पर्धी बना दिया है.

वित्तीय वर्ष की तस्वीर

वर्तमान वित्तीय वर्ष (अप्रैल–अक्टूबर 2025) में, भारत का कुल निर्यात 0.63% बढ़कर $254.25 अरब हो गया है, जबकि आयात 6.37% बढ़कर $451.08 अरब हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक मांग न सुधरे, सप्लाई चेन सुचारू न हो, और कच्चे तेल की कीमतें कार्रवाई न करें, तो यह व्यापार घाटा और बढ़ सकता है.

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

आगे आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के सामने यह मुख्य चुनौतियाँ हैं:

1. निर्यात‑विविधता बढ़ाने की जरूरत ताकि आयात दबाव को कम किया जा सके
2. महंगे आयात, जैसे कि सोना, पर नीतिगत नियंत्रण
3. चालू खाते पर लगातार दबाव, अगर यह ट्रेंड जारी रहा

विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत को नीतिगत संतुलन बनाए रखना होगा, साथ ही व्यापार वृद्धि और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना होगा.
 


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