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भारत का व्यापार घाटा 13 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, सोने-चांदी का आयात बढ़ा
भारत के निर्यात में वृद्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन आयात में आई तेज उछाल और अमेरिका से व्यापारिक तनाव ने चिंता बढ़ा दी है. सरकार त्योहारी मांग और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आने वाले महीनों में आयात-निर्यात संतुलन की रणनीति पर काम कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
भारत का व्यापार घाटा सितंबर 2025 में 13 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. वाणिज्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वस्तुओं का निर्यात जहां 6.7% बढ़कर 36.38 अरब डॉलर रहा है. वहीं, आयात में 16.7% की तेज वृद्धि दर्ज की गई जो 68.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस कारण कुल व्यापार घाटा बढ़कर 32.15 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल सितंबर में यह 24.65 अरब डॉलर था.
सेवाओं के निर्यात में गिरावट, फिर भी अधिशेष बरकरार
सितंबर में सेवाओं का निर्यात 5.46% घटकर 30.82 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात भी 7.55% घटकर 15.29 अरब डॉलर दर्ज किया गया. इस तरह भारत ने सेवाओं के क्षेत्र में 15.53 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया. वाणिज्य विभाग ने बताया कि यह आंकड़े फिलहाल अनुमानित हैं और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अंतिम आंकड़े आने पर इनमें संशोधन संभव है.
सोने-चांदी और उर्वरक के आयात में तेज उछाल
सितंबर महीने में सोने के आयात में 107% की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह 9.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया. चांदी का आयात भी 139% बढ़कर 1.3 अरब डॉलर रहा. उर्वरकों का आयात 202% बढ़कर 2.36 अरब डॉलर और इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का आयात 15% बढ़कर 9.82 अरब डॉलर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के आयात में यह उछाल त्योहारी सीजन की मांग से जुड़ा हुआ है.
वित्त वर्ष की पहली छमाही में निर्यात में सुधार
चालू वित्त वर्ष (अप्रैल से सितंबर) के पहले छह महीनों में वस्तुओं का कुल निर्यात 220.12 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 213.68 अरब डॉलर से अधिक है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सोने के आयात में वृद्धि के बावजूद, अप्रैल से सितंबर के बीच कुल आयात मात्रा के लिहाज से 8.7% कम रहा है.
अमेरिकी शुल्क से निर्यात पर असर
हालांकि कुल निर्यात में वृद्धि हुई, लेकिन अमेरिका को निर्यात में गिरावट दर्ज की गई. अगस्त के 6.87 अरब डॉलर की तुलना में सितंबर में अमेरिका को निर्यात घटकर 5.43 अरब डॉलर रह गया. इसकी मुख्य वजह 7 अगस्त से लगाए गए 25% जवाबी शुल्क और 27 अगस्त से लागू 25% अतिरिक्त शुल्क रहे. वाणिज्य सचिव ने कहा, “वैश्विक बाजार में व्यवधान के बावजूद हमारे निर्यात की गति बनी रही है. आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव रातोंरात संभव नहीं है, इसलिए भारतीय उद्योग पर इसका असर सीमित रहेगा.”
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