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भारत में टेक स्टार्टअप फंडिंग में 25% गिरावट, फिर भी ग्लोबल टॉप-3 में कायम
ग्रीन ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में उछाल; विशेषज्ञ बोले - यह ‘रीसेट’ है, रिट्रीट नहीं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में टेक स्टार्टअप फंडिंग 2025 की पहली छमाही में 4.8 अरब डॉलर पर सिमट गई, जो कि 2024 की पहली छमाही के मुकाबले 25% और दूसरी छमाही के मुकाबले 19% की गिरावट को दर्शाती है. यह आंकड़ा Tracxn की ‘इंडिया टेक सेमी-एनुअल फंडिंग रिपोर्ट’ से सामने आया है, जो बताता है कि कोविड काल के बाद आए निवेश उछाल के बाद अब बाजार संतुलन की ओर लौट रहा है.
हालांकि इस गिरावट के बावजूद भारत ने ग्लोबली तीसरे सबसे अधिक फंडिंग पाने वाले स्टार्टअप ईकोसिस्टम के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है - अमेरिका और ब्रिटेन के बाद. विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट चिंता की नहीं बल्कि एक स्वस्थ रीसेट का संकेत है.
"भारतीय टेक ईकोसिस्टम अब भी मजबूत"
Tracxn की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा, “भले ही कुल निवेश में गिरावट आई हो, लेकिन भारत का टेक ईकोसिस्टम अब भी मजबूती से खड़ा है. परिवहन, रिटेल और एंटरप्राइज टेक जैसे क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी यह दिखाती है कि वे लंबे समय के लिए बड़े और बुनियादी मसलों को हल करने वाले स्टार्टअप्स पर भरोसा जता रहे हैं.”
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स टेक सेक्टर में साल-दर-साल 104% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें 1.6 अरब डॉलर का निवेश हुआ. यह तेजी खासतौर पर Erisha E Mobility के 1 अरब डॉलर के सीरीज D राउंड और GreenLine के 275 मिलियन डॉलर के सीरीज A राउंड से आई है.
Eximius Ventures की फाउंडर पर्ल अग्रवाल ने कहा, “यह ऐसा सेक्टर है जहां ग्राउंड लेवल इम्पैक्ट और मुनाफे की संभावना दोनों हैं. भारत में सप्लाई चेन डिजिटलीकरण और ईवी अपनाने की रफ्तार, खासकर टियर 2 और 3 शहरों में, इसको एक एक्जीक्यूशन-ड्रिवन कहानी बना रही है, जिस पर निवेशक दांव लगाने को तैयार हैं.”
निवेश में गिरावट, पर रुझान सकारात्मक
रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि जहां शुरुआती और मिड-स्टेज स्टार्टअप्स को थोड़ी मुश्किलों का सामना हो रहा है, वहीं सेक्टोरल थीम्स जैसे ग्रीन मोबिलिटी, फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, और एंटरप्राइज SaaS में लंबी अवधि के अवसर दिख रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कैपिटल ड्राउट नहीं बल्कि 'वैल्यू ड्रिवन इन्वेस्टमेंट' का दौर है, जिसमें सिर्फ वही स्टार्टअप्स आगे बढ़ रहे हैं जिनके पास स्पष्ट बिजनेस मॉडल और समस्या समाधान की ताकत है.
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