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अगले 10 वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंचेगी भारत की स्पेस इकोनॉमी: जितेंद्र सिंह

नीतिगत सुधार, निजी निवेश और स्टार्टअप्स के दम पर अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ेगा भारत का दबदबा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (स्पेस इकोनॉमी) अगले एक दशक में करीब पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और तेजी से बढ़ रहे स्पेस स्टार्टअप्स के कारण भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अभूतपूर्व विकास की ओर बढ़ रहा है.

भारत की स्पेस इकोनॉमी में तेजी से हो रहा विस्तार

जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में भारत की स्पेस इकोनॉमी का आकार लगभग 8-9 अरब डॉलर है और देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं. कुछ वर्षों पहले इनकी संख्या बेहद सीमित थी. उन्होंने कहा कि यह वृद्धि भारत में मजबूत होते नवाचार (इनोवेशन) इकोसिस्टम और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी का प्रमाण है.

उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज आम नागरिक खुद को भारत की वैज्ञानिक प्रगति से जुड़ा हुआ महसूस करता है और उसमें अपनी भागीदारी देखता है." उनके अनुसार विज्ञान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन चुका है.

प्रधानमंत्री मोदी की पहल ने बदली तस्वीर

जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जनचर्चा के केंद्र में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi की दूरदर्शी सोच को दिया. उन्होंने कहा कि **डिजिटल इंडिया**, Gaganyaan और Deep Ocean Mission जैसी पहलों ने तकनीक आधारित विकास को मुख्यधारा में लाने का काम किया है.

चंद्रयान-3 ने बढ़ाया वैश्विक सम्मान

मंत्री ने कहा कि चंद्रयान-3 जैसे मिशनों ने भारत को दुनिया के अग्रणी अंतरिक्ष देशों की श्रेणी में पहुंचाया है और आम लोगों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई है. उन्होंने कहा कि भारत का आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान स्वदेशी तकनीकों पर भरोसा और मजबूत करेगा.

शासन और विकास में बढ़ रहा अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग

जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब केवल अंतरिक्ष अन्वेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और बुनियादी ढांचा विकास में भी अंतरिक्ष तकनीक का व्यापक उपयोग कर रहा है. उन्होंने बताया कि पीएम गति शक्ति और शहरी विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों में योजना निर्माण, निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है.

निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खुले नए अवसर

मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों के चलते अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया है. इससे स्टार्टअप्स अब लॉन्च सेवाओं, सैटेलाइट निर्माण, डेटा सेवाओं और विभिन्न अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "कम समय में जिस गति से यह क्षेत्र बढ़ा है, वह भारत की स्पेस इकोनॉमी की अपार संभावनाओं को दर्शाता है."

अस्थायी चुनौतियां वैज्ञानिक प्रगति का हिस्सा

हाल में हुए कुछ प्रक्षेपणों में आई तकनीकी चुनौतियों पर बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालिया PSLV मिशन में आई तकनीकी गड़बड़ी का विश्लेषण पूरा कर लिया गया है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य के मिशन इन अनुभवों से और अधिक मजबूत बनेंगे.

उन्होंने कहा कि अस्थायी असफलताएं वैज्ञानिक प्रगति का स्वाभाविक हिस्सा होती हैं और चंद्र तथा अंतरग्रहीय मिशनों में भारत की पहली कोशिश में मिली सफलताएं दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों की तुलना में देश की मजबूत उपलब्धियों को दर्शाती हैं.
 


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