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महंगाई बढ़कर 3.93% पर पहुंची, अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें भी महंगाई को ऊपर धकेल रही हैं. व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 18.46 फीसदी पर बनी हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 hours ago

देश में महंगाई एक बार फिर रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है. मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48 फीसदी थी. हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास है, लेकिन खाद्य पदार्थों, ईंधन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सेंट्रम ब्रोकरेज का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव इसी तरह बना रहा तो RBI अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है.

खाद्य महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता

मई में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.78 फीसदी हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20 फीसदी थी. सब्जियों की कीमतों में तेजी इसका प्रमुख कारण रही. टमाटर की महंगाई दर 35.3 फीसदी से बढ़कर 48.4 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि अदरक की महंगाई 14.4 फीसदी से बढ़कर 32.5 फीसदी हो गई. हालांकि आलू की कीमतों में अभी भी राहत बनी हुई है और इसके दाम सालाना आधार पर 23.7 फीसदी नीचे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्ष खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट का आधार प्रभाव अब खत्म हो रहा है, जिससे आने वाले महीनों में और अधिक खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं.

ईंधन महंगा, परिवहन लागत पर असर

15 से 25 मई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी. इसका असर अब महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगा है. परिवहन महंगाई अप्रैल में लगभग शून्य थी, जो मई में बढ़कर 1.75 फीसदी हो गई. वहीं, माल ढुलाई सेवाओं की महंगाई 7.63 फीसदी तक पहुंच गई है. बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का असर आने वाले समय में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

सोना-चांदी की चमक से भी बढ़ा महंगाई का दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें भी महंगाई को ऊपर धकेल रही हैं. व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 18.46 फीसदी पर बनी हुई है. चांदी के आभूषणों की महंगाई 155 फीसदी से अधिक दर्ज की गई है, जबकि सोना, हीरा और प्लैटिनम से जुड़े उत्पादों की महंगाई 40 फीसदी से ऊपर बनी हुई है. आयात शुल्क में वृद्धि का असर अब भी बाजार में दिखाई दे रहा है.

रेस्तरां में खाना भी हुआ महंगा

बढ़ती लागत का असर होटल और रेस्तरां क्षेत्र पर भी दिख रहा है. रेस्तरां और होटल सेवाओं की महंगाई अप्रैल के 4.2 फीसदी से बढ़कर मई में 5.75 फीसदी हो गई. विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी की सीमित उपलब्धता और बढ़ती परिचालन लागत के कारण होटल एवं रेस्तरां संचालकों पर दबाव बढ़ा है, जिसका बोझ अब ग्राहकों पर पड़ रहा है.

कुछ राहत के संकेत भी मौजूद

महंगाई के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं. जून की शुरुआत में देश के प्रमुख जलाशयों में जल स्तर सामान्य से बेहतर रहा है. टमाटर, प्याज और आलू की बाजार आवक भी महीने-दर-महीने 5 से 6 फीसदी बढ़ी है. इसके अलावा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो सप्ताह तक भीषण गर्मी की संभावना कम बताई है. इससे खाद्य महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण रहने की उम्मीद की जा रही है.

मानसून और कच्चा तेल बने सबसे बड़े जोखिम

सेंट्रम ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में मानसून और कच्चे तेल की कीमतें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. मौसम विभाग के दूसरे अनुमान के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. सामान्य वर्षा के मुकाबले करीब 90 फीसदी बारिश का अनुमान है, जबकि कमजोर मानसून की संभावना 60 फीसदी तक बताई गई है. एल नीनो के संकेत भी कृषि उत्पादन के लिए चुनौती बन सकते हैं.

दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर ईंधन, परिवहन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा.

RBI की अगली चाल क्या होगी?

ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल महंगाई RBI के लक्ष्य के करीब है और कोर महंगाई भी नियंत्रण में है. ऐसे में अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम दिखाई देती है. हालांकि यदि खाद्य महंगाई, ईंधन कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी जारी रहती है और CPI महंगाई RBI की ऊपरी सीमा की ओर बढ़ती है, तो अक्टूबर 2026 में केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है.

सेंट्रम ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत खुदरा महंगाई करीब 5.1 फीसदी रह सकती है. इससे संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा है.
 


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