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चिप से सिस्टम तक भारत की तैयारी, 2035 तक 200 अरब डॉलर हो सकता है सेमीकंडक्टर बाजार
सेमीकॉन इंडिया में 52 देशों की भागीदारी और 600 से ज्यादा एग्जीबिटर्स की मौजूदगी, चिप डिजाइन से लेकर एडवांस्ड पैकेजिंग और तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर भारत का जोर
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी भूमिका को विस्तार देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. सेमीकॉन इंडिया में दुनिया के 52 देशों से प्रतिनिधियों की भागीदारी और 600 से ज्यादा एग्जीबिटर्स की मौजूदगी इस क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी को दिखाती है. EY और ISBA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2026 में करीब 64 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अवसर रखता है. ऐसे में भारत का फोकस सिर्फ चिप के आयात पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने पर है.
सेमीकॉन इंडिया में करीब 51,666 रजिस्ट्रेशन हुए और लगभग 40 हजार लोगों ने इसमें हिस्सा लिया. सम्मेलन में करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों समेत 600 से अधिक एग्जीबिटर्स ने सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी तकनीक और संभावनाओं को प्रदर्शित किया. जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन समेत छह देशों के पवेलियन के साथ 12 राज्यों के पवेलियन भी सम्मेलन में शामिल रहे.
चिप डिजाइन से सिस्टम तक वैल्यू चेन पर जोर
सेमीकॉन इंडिया के दौरान 56 एमओयू और रणनीतिक पहलों की घोषणा की गई. इनमें चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इससे संकेत मिलता है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय डिजाइन से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दे रहा है.
सेमीकॉन 2.0 पर फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के मुताबिक, सरकार का फोकस सेमीकॉन 2.0 पर है, जिसका कुल बजट 1.27 लाख करोड़ रुपये है. इस पहल में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रिसर्च, स्किलिंग और उद्योग से जुड़ी ट्रेनिंग पर भी जोर दिया जा रहा है.
सेक्टर के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है. सम्मेलन के दौरान स्किलिंग, इंटर्नशिप, हैकाथॉन और इंडस्ट्री-आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया. डिजिटल इंडिया RISC-V ग्रैंड चैलेंज में 1,236 टीमों के 5,045 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब अमेरिका और चीन समेत कई देश वैश्विक चिप वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए घरेलू क्षमता विकसित करने के साथ वैश्विक कंपनियों, तकनीक और निवेश को आकर्षित करना भी इस क्षेत्र की रणनीति का अहम हिस्सा बन रहा है.
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