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EV अपनाने से घटने लगी भारत की तेल निर्भरता, क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा देश: रिपोर्ट
रिपोर्ट में ग्रीन फाइनेंस के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया गया है. ग्रीन बॉन्ड्स के प्रति निवेशकों की मांग तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में 10,000 करोड़ रुपये के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड इश्यू को मजबूत प्रतिक्रिया मिली.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का बढ़ता उपयोग अब ऊर्जा खपत के पैटर्न को बदलने लगा है. Uniqus की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, EV अपनाने और क्लीन एनर्जी में निवेश बढ़ने से देश की तेल पर निर्भरता में शुरुआती कमी के संकेत मिलने लगे हैं.
EV अपनाने से घट रही तेल खपत
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से रोजाना करीब 2.3 मिलियन बैरल तेल की खपत टल गई. यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 5.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक हो सकता है. इससे साफ है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेल की मांग को धीरे-धीरे कम कर रही है.
भारत में यह बदलाव मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी के कारण हो रहा है. ये दोनों सेगमेंट तेजी से विस्तार कर रहे हैं और पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
बिजली बनेगी प्रमुख ऊर्जा स्रोत
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में भारत में बिजली प्रमुख ऊर्जा स्रोत बन सकती है. फिलहाल कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है, जो 2070 तक बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
साथ ही, सौर, पवन और जल जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ेगी. अनुमान है कि 2070 तक कुल बिजली उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी 80 से 85 प्रतिशत तक हो सकती है. यह साफ संकेत है कि भारत धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली की ओर बढ़ रहा है.
उत्सर्जन में कमी और ग्रीन फाइनेंस का बढ़ता रोल
रिपोर्ट में Climate TRACE के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2025 में भारत ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच उत्सर्जन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की. बिजली क्षेत्र में 2.6 प्रतिशत की कमी आई, जबकि ऊर्जा मांग और आर्थिक विकास दोनों बढ़ रहे थे.
यह बदलाव देशभर में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार से जुड़ा हुआ है और यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास और उत्सर्जन के बीच धीरे-धीरे दूरी बन रही है.
ग्रीन बॉन्ड्स में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी
रिपोर्ट में ग्रीन फाइनेंस के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया गया है. ग्रीन बॉन्ड्स के प्रति निवेशकों की मांग तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में 10,000 करोड़ रुपये के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड इश्यू को मजबूत प्रतिक्रिया मिली.
इसके साथ ही, लंबे समय के टिकाऊ निवेश साधनों के जरिए 20,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना भी बनाई जा रही है.
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों से हटकर इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. EV अपनाने, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन फाइनेंस का यह कॉम्बिनेशन आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है.
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