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एमएसएमई क्षेत्र को ₹40.4 लाख करोड़ का कर्ज
CRIF High Mark की रिपोर्ट में खुलासा, माइक्रो उद्यमों के नाम 174 लाख सक्रिय ऋण
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को दिया गया कुल ऋण मार्च 2025 तक ₹40.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो वर्ष दर वर्ष 20.1 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है. यह जानकारी क्रेडिट ब्यूरो CRIF High Mark की ताज़ा MSMEx स्पॉटलाइट रिपोर्ट में सामने आई है, जो बुधवार को जारी की गई.
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और लक्षित सरकारी योजनाओं जैसे ‘उद्यम असिस्ट’ के कारण कारोबारों में औपचारिकरण और ऋण परिपक्वता बढ़ी है. माइक्रो उद्यमों ने सक्रिय ऋण की संख्या के लिहाज से 81.1 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की, जबकि छोटे उद्यमों का ऋण मूल्य के आधार पर सबसे बड़ा योगदान (39.9 प्रतिशत) रहा.
बीते दो वर्षों में माइक्रो स्तर के उधारकर्ताओं में प्रोपराइटरशिप फर्मों की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से घटकर 62.8 प्रतिशत रह गई, वहीं प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की हिस्सेदारी 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई है. CRIF ने इस रुझान को ‘उद्यम असिस्ट’ जैसी योजनाओं से जोड़ते हुए कहा कि मई 2025 तक 6.4 करोड़ से अधिक उद्यम इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं.
CRIF High Mark के चेयरमैन और इंडिया व साउथ एशिया के रीजनल मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन सेठ ने कहा, “भारत की ऋण अर्थव्यवस्था को माइक्रो बिज़नेस आगे बढ़ा रहे हैं, जिनके नाम 174 लाख सक्रिय ऋण और ₹10.8 लाख करोड़ की क्रेडिट एक्सपोजर दर्ज है. यह प्रगति लेंडरों के भरोसे, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की लक्षित पहलों की बदौलत संभव हो पाई है.”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि माइक्रो व्यवसायों को ऋण देने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 45 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी बने हुए हैं. वहीं छोटे और मध्यम उद्यम (SME) ऋण में निजी बैंक लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर हैं.
एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) ने भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, खासकर प्राथमिक क्षेत्र के ऋण (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) के तहत छोटे व्यवसायों को दिए जा रहे पुनः ऋण (on-lending) के चलते.
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