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भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता: यूरोपीय संघ से 'ऊर्जा और कच्चा माल' अध्याय हटाने पर सहमति
भारत ने EU के साथ FTA वार्ता में 'ऊर्जा और कच्चा माल' अध्याय को अलग करवा कर बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल की है. EU ने एकतरफा तरीके से प्रस्तावित 'ऊर्जा और कच्चा माल' अध्याय को बातचीत से अलग रखने पर सहमति दी है. इस अध्याय में भारत से पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों, कपास, लौह और इस्पात, तांबा तथा अन्य महत्वपूर्ण धातुओं की निर्बाध आपूर्ति की प्रतिबद्धता अनिवार्य करने का प्रावधान था.
भारत की आपूर्ति नीति पर EU की आपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार EU ने इस अध्याय में भारत से कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति की मांग की थी, जिससे भारत की घरेलू आपूर्ति नीति पर असर पड़ सकता था. भारत ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया. भारत का कहना था कि यह प्रावधान उसके संसाधनों के एकतरफा प्रवाह को बढ़ावा देता है, जो विकासशील देशों के लिए अनुचित है.
कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव
कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण विश्वभर में ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं. चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध ने भी आपूर्ति श्रृंखलाओं की विविधता और विश्वसनीयता की आवश्यकता को उजागर किया है.
EU की आपूर्ति नीति और भारत की आपत्ति
EU ने तय किया है कि 2030 से किसी भी महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति का 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा किसी एक देश से आयात नहीं किया जाएगा. हालांकि, भारत ने इस नीति पर आपत्ति जताते हुए इसे अपने घरेलू उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि EU का व्यापार समझौते का रुख विरोधाभासों से भरा है. EU विकासशील देशों से कोई प्रतिबंध नहीं चाहता है, जबकि कार्बन-उत्सर्जन वाली वस्तुओं पर कर, सख्त प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नियंत्रण जैसे प्रतिबंध को लागू करने का अधिकार अपने पास रखता है.
प्रधानमंत्री मोदी और EU अध्यक्ष की बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 28 फरवरी को संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि दोनों पक्ष 2025 के अंत तक मुक्त व्यापार करार को पूरा करना चाहते हैं. इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, हरित विकास, सुरक्षा, कौशल और गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त खाका तैयार किया.
भारत और EU के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक व्यापार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. दोनों पक्षों ने इस समझौते को पारस्परिक रूप से लाभकारी और संतुलित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. आने वाले महीनों में इस समझौते के विभिन्न पहलुओं पर और बातचीत की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिल सकती है.
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