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भारत की GDP ने तोड़ा छह तिमाहियों का रिकॉर्ड, दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत वृद्धि
भारत की अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है. विनिर्माण और सेवाओं की तेजी ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है. हालांकि नॉमिनल ग्रोथ में कमी और राजकोषीय दबाव सरकार के सामने चुनौतियां बनाए रखेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाहरी दबावों के बीच भारत ने इस बार अपनी आर्थिक मजबूती का दमदार प्रदर्शन किया है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की GDP ग्रोथ ने उम्मीदों को न केवल पीछे छोड़ा, बल्कि छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर भी छू लिया. तेज विनिर्माण गतिविधियों और अनुकूल आधार प्रभाव ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
विनिर्माण क्षेत्र ने संभाली अर्थव्यवस्था
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की GDP 8.2% बढ़ी. मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार कम आधार और सॉफ्ट डिफ्लेटर ने वृद्धि को सहारा दिया. इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र ने 9.1% की तेज रफ्तार दिखाई. अमेरिकी शुल्क के बावजूद निर्यात आधारित गतिविधियों ने भी मजबूती बरकरार रखी.
अनुमान से अधिक रही वृद्धि
निजी अर्थशास्त्रियों ने तिमाही GDP ग्रोथ 7–7.5% के बीच रहने का अनुमान लगाया था जबकि RBI ने इसे 7% माना था. इसके विपरीत वास्तविक ग्रोथ काफी अधिक रही. जुलाई–सितंबर में नॉमिनल GDP 8.7% बढ़ी जबकि वित्त मंत्रालय ने पूरे वर्ष के लिए 10.1% वृद्धि का अनुमान रखा है.
राजस्व व राजकोषीय मोर्चे पर चुनौतियां
वास्तविक और नॉमिनल GDP ग्रोथ के बीच अंतर वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे कम है. नॉमिनल ग्रोथ में गिरावट से कर संग्रह प्रभावित हो सकता है. इससे केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को GDP के 4.4% तक सीमित रखना मुश्किल हो सकता है.
पहली छमाही में 8% की औसत वृद्धि
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में GDP ग्रोथ 8% रही. पहली तिमाही में यह 7.8% थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के बाद पूरे वित्त वर्ष के लिए अनुमान बढ़ाना पड़ सकता है. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार तीसरी तिमाही में भी बेहतर गति जारी रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि जीएसटी और आयकर संग्रह में मजबूती के साथ ब्याज दरों में कटौती से निजी खपत को बढ़ावा मिला है.
सेवा और कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन
सितंबर तिमाही में सेवा क्षेत्र 9.2% की वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा. कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.5% रही, जो पिछली तिमाही के 3.7% से थोड़ा कम है. केयरऐज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि GDP डेटा उम्मीद से बेहतर है. उनके अनुसार आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI दरों में कटौती पर विचार कर सकता है.
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